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5 दिसंबर 2017 को जब अयोध्या मामले की सुनवाई शुरू हुई थी तब कोर्ट ने इसे महज जमीन विवाद बताया था. हालांकि इस दौरान मुस्लिम पक्षकार की ओर से पेश वकील राजीव धवन ने कहा कि नमाज पढ़ने का अधिकार है और उसे बहाल किया जाना चाहिए.
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धवन ने कोर्ट में दलील दी थी कि नमाज अदा करना धार्मिक प्रैक्टिस है और इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. ये इस्लाम का अभिन्न अंग है. क्या मुस्लिम के लिए मस्जिद में नमाज पढ़ना जरूरी नहीं है?
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