Murshidabad Babri Masjid Controversy: Babar के नाम पर मस्जिद..हिंदुओं को चिढ़ाने की जिद?

Murshidabad Babri Masjid Controversy: कहते हैं ना धर्म जब राजनीति की गोद में बैठ जाए तो सवाल मंदिर या मस्जिद का नहीं सवाल मैसेज का होता है और यही पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हो रहा है।

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Dheeraj Sharma
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Murshidabad Babri Masjid Controversy: कहते हैं ना धर्म जब राजनीति की गोद में बैठ जाए तो सवाल मंदिर या मस्जिद का नहीं सवाल मैसेज का होता है और यही पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हो रहा है।

Murshidabad Babri Masjid Controversy: कहते हैं ना धर्म जब राजनीति की गोद में बैठ जाए तो सवाल मंदिर या मस्जिद का नहीं सवाल मैसेज का होता है और यही पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हो रहा है। मुर्शिदाबाद में चुनावी साल में बाबरी मस्जिद बनाया आने का अचानक ख्याल आता है. यह राजनीति नहीं तो और क्या है? क्या पश्चिम बंगाल में चुनाव के लिए धार्मिक कार्ड खेला जा रहा है? क्या पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है? क्या बाबर के नाम पर मस्जिद बनाने का हिंदूवादी संगठनों का विरोध जायज है? लेकिन इससे पहले हमें चर्चा की शुरुआत करें. हम आपको बता दें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में बड़ा बयान दिया है. बाबरी मस्जिद में सीएम योगी का बड़ा बयान कयामत तक बाबरी नहीं बन पाएगी.

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यह कहना है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का. जो सपने देख रहे हैं बाबरी बनाने का वो सपने देखते रह जाएंगे लेकिन बाबरी ढांचे का पुन निर्माण नहीं होगा. हम लोगों ने कहा था ना कि रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बन गया ना मंदिर अयोध्या में कोई संदेह है कोई संदेह है? और हम आज फिर इस बात को कह रहे हैं कि कयामत के दिन तक भी कभी कयामत का दिन तो कभी आना ही नहीं है और इसलिए बाबरी ढांचे का पुनर्निर्माण कभी होना ही नहीं है. जो कयामत के दिन आने का सपना देख रहे हैं. कभी वो दिन आने वाला नहीं है। और उनके सपनों को ऐसे ही हम अपनी विरासत को सम्मान देते हुए भारत की गौरवशाली परंपरा को सनातन धर्म की इस परंपरा को जैसे प्रधानमंत्री जी ने 25 नवंबर को अयोध्या धाम में आकर के सनातन के प्रतीक श्री राम मंदिर में भव्य केसरिया ध्वज का आरोहण किया था. 

यह केसरिया ध्वज हमेशा ही भारत के इस गौरव को सनातन के इस गौरव को आगे बढ़ाने का कार्य इसी मजबूती के साथ करे और इसी पर चर्चा करने के लिए खास पैनल मेरे साथ जुड़ रहा है. महंत नवल किशोर दास जी महाराज जुड़ रहे हैं. मुमताज आलम रिज़वी साहब, विवेक श्रीवास्तव साहब, महंत रामदूत जी और शुभांकर भट्टाचार्य साहब बहुत धन्यवाद आपका हमारे मंच पे आने के लिए। अह महंत नवल किशोर दास जी मैं आपसे शुरुआत करना चाहूंगा। अगर मंदिर बन सकता है तो मस्जिद भी बन सकती है। क्या दिक्कत है उसमें?

Sawal hai Bawal Hai
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