सवाल यह है क्या यूपी में एसआईआर के नाम पे अखिलेश यादव लोगों को गुमराह कर रहे हैं? जैसा कि बीजेपी कह रही है। क्या एसआईआर के नाम पर पीडीए की सियासत कर रहे हैं अखिलेश?
UP SIR Controversy: यूपी में ना कर्फ्यू है ना दंगा है। यूपी में सब चंगा है। सबके प्रति सम्मान और आदर का भाव रखें और कोई ऐसा आचरण ना करें जो आचरण देश की भावी पीढ़ी को गलत दिशा की ओर अग्रसर करे। खैर जिस प्रकार का प्रतिपक्ष है उनसे इसकी अपेक्षा करना अपने आप में एक बेवकूफी जैसा होगा। जमीनी हकीकत यह है कि गांव-गांव में भाजपा से जुड़े सामंतवादी और प्रभुत्ववादी तत्व पीडीए और गरीब वर्ग की सूची बनाकर उनके नाम से बल्क में फॉर्म से दाखिल कर रहे हैं। कोई पीडीए का जल्दी फॉर्म नहीं कटवा रहा। फॉर्म भर के नहीं कटवा रहा। यह तमाम सामंतवादी प्रभुत्ववादी लोग हैं जो पीडीए के वोटों को बल्क में कटवा रहे हैं। जैसा नारी शक्ति का भी अपमान है। एक इतना अनुभवी राजनेता जो सौभाग्य से आज प्रदेश की राज्यपाल के रूप में अपना मार्गदर्शन और नेतृत्व हम
सबको प्रदान कर रही है। उनके प्रति इस प्रकार का अभद्र व्यवहार इस समाजवादी पार्टी की वास्तविक सोच को प्रतिपक्ष की नकारात्मक दृष्टिकोण को भी प्रदर्शित करता है।
बहुत दुखद है। दुखद इसलिए है कि जब लोकतंत्र में यह अधिकार है कि हम किसी पार्टी का जिसकी सरकार उसका विरोध कर सकते हैं। ये वो सरकार है जो विरोध स्वीकार कर ही नहीं सकती है। विरोध को ना देख सकती है। विरोध को ना सुन सकती है और अपना राग गाते रहते हैं। अपनी राग अलापते रहते हैं। इतना झूठी सरकार हमने आपने नहीं देखी होगी। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से एसआईआर प्रक्रिया सवालों के घेरे में है और आरोप लगाया है अखिलेश यादव ने। उन्होंने कहा फर्जी तरीके से फॉर्म साथ भरा जा रहा है और पीडीए के जो मतदाता है उनका नाम जबरदस्ती कटवाया जा रहा है।
सवाल यह है क्या यूपी में एसआईआर के नाम पे अखिलेश यादव लोगों को गुमराह कर रहे हैं? जैसा कि बीजेपी कह रही है। क्या एसआईआर के नाम पर पीडीए की सियासत कर रहे हैं अखिलेश? क्या यूपी की सियासत में शंकराचार्य का मुद्दा बड़ा बनेगा? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिसे हम इस चर्चा में शामिल करेंगे और इस पे बात करने के लिए एक बहुत ही खास पैनल हमारे साथ जुड़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी से विजय शर्मा साहब, कांग्रेस पार्टी से विशाल लोधी साहब, अनुराग भदोरिया साहब, समाजवादी पार्टी से और वरिष्ठ पत्रकार एन के सिंह साहब. देखिए सवाल है बवाल है पर खास चर्चा.
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