भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उसके साथ गए 17 भारतीय वर्कर्स की ये कहीनी है, रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में सड़कों की सफाई का काम कर रहे हैं.
भारत में बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ज्यादातर युवा किसी अच्छी कंपनी में नौकरी करने का सपना देखते हैं. आमतौर पर इंजीनियरिंग करने के बाद लोग सॉफ्टवेयर, आईटी या किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करना चाहते हैं. ऐसी स्थिति में अगर कोई इंजीनियर सड़कों पर झाड़ू लगाते हुए नजर आए, तो लोगों को हैरानी होना स्वाभाविक है. लेकिन हाल ही में रूस से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने बहुत से लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. यह कहानी एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उसके साथ गए 17 भारतीय वर्कर्स की है, जो रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में सड़कों की सफाई का काम कर रहे हैं.
इन 17 भारतीय वर्कर्स में 26 साल का मुकेश मंडल भी शामिल है. मुकेश का कहना है कि वह भारत में पहले सॉफ्टवेयर डेवलपर के तौर पर काम कर चुका है. उसने बताया कि उसने माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों के टूल्स पर काम किया है और AI, चैटबॉट और GPT जैसे नए टेक्नोलॉजी टूल्स का इस्तेमाल किया है. यानी वह पढ़ा-लिखा और टेक्नोलॉजी की अच्छी समझ रखने वाला इंजीनियर है. इसके बावजूद उसने रूस जाकर सफाई कर्मचारी के तौर पर काम करने का फैसला किया, जो कई लोगों को अजीब लग सकता है.
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