ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देकर पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान से व्यापार करेगा उस पर 25% अतिरिक्त टेरिफ लगाया जाएगा.
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देकर पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान से व्यापार करेगा उस पर 25% अतिरिक्त टेरिफ लगाया जाएगा. इसके बाद भारत को लेकर सवाल उठने लगे. क्या अमेरिका के दबाव में भारत ईरान के चाहबार बंदरगाह से पीछे हट सकता है? क्या भारत अपनी रणनीतिक परियोजना को दांव पर लगाएगा? हालांकि भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि ऐसा नहीं होगा. विदेश मंत्रालय ने दो टूक में कहा कि चाबहार भारत की जरूरत है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. असल में चाबहार सिर्फ एक बंदरगाह नहीं है. यह भारत की रणनीतिक सोच का अहम हिस्सा है. चाबहार
ईरान के दक्षिण पूर्वी तट पर ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है.
भारत का गेम चेंजर माना जाता है
यह ईरान का पहला गहरे पानी वाला पोर्ट है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक सीधी पहुंच देता है. यही वजह है कि चाबड़ को भारत का गेम चेंजर माना जाता है. चीन और पाकिस्तान ने ग्वादर पोर्ट के सामने यह भारत का मजबूत जवाब भी है. ग्वादर से चाबहार की दूरी जमीन से करीब 400 कि.मी. और समुद्र से सिर्फ 100 कि.मी. है. अगर इतिहास देखें तो भारत की भागीदारी चाबहार में 2002 से 2003 के बीच शुरू हुई थी. 2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ. इसके तहत भारत ने करोड़ों के उपकरण देने की प्रतिबद्धता जताई.
ईरान के साथ 100 साल का करार किया
साथ ही 25 करोड़ डॉलर की क्रेडिट लाइन का भी ऐलान हुआ. 2024 में भारत ने चाबहार पोर्ट के संचालन के लिए ईरान के साथ 100 साल का करार किया. यह समझौता साफ बताता है कि भारत इस पोर्ट को लेकर लंबी रणनीति पर काम कर रहा है. अमेरिका का दबाव कोई नया नहीं है. इससे पहले भी 2003 में और 2018 में ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए गए थे. लेकिन तब भी चाबहार को अफगानिस्तान के लिए जरूरी मानते हुए अमेरिका ने भारत को छूट दी थी. यह छूट अप्रैल 2026 तक वैध है. यही वजह है कि भारत फिलहाल किसी भी दबाव में पीछे हटने के मूड में नहीं है. भारत का मानना है कि चाबहार मानवीय सहायता, व्यापार और क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए अहम है. इसे केवल ईरान के चश्मे से नहीं देखा जा सकता. भारत के लिए चाबहार की अहमियत कई स्तरों पर है. यह पोर्ट भारत को अफगानिस्तान, सेंट्रल, एशिया, रूस और यूरोप तक सीधे कनेक्टिविटी देता है.
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