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Gig Workers: भारत में तेजी से बढ़ रही गिग इकोनॉमी को अब कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी पूरी हो गई है. केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनमें जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म के डिलीवरी पार्टनर और कैब ड्राइवरों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने का प्रावधान किया गया है. इन नियमों का उद्देश्य गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी वह सुरक्षा देना है, जो अब तक नियमित कर्मचारियों को मिलती रही है.
ड्राफ्ट के अनुसार नियम
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, किसी एक कंपनी या प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिन उसी प्लेटफॉर्म के लिए काम करना होगा. वहीं, जो वर्कर एक से अधिक प्लेटफॉर्म पर काम करते हैं, उनके लिए यह सीमा 120 दिन तय की गई है. खास बात यह है कि अगर कोई वर्कर एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करता है, तो उसे तीन दिन गिना जाएगा. इससे न्यूनतम दिनों की शर्त पूरी करना आसान हो जाएगा.
रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
सरकार ने प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए गिग वर्कर्स का पंजीकरण यानी कि रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है. 16 वर्ष से अधिक आयु के सभी गिग वर्कर्स को आधार कार्ड से जुड़ा रजिस्ट्रेशन कराना होगा. उनका डेटा ई-श्रम पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा. हर पंजीकृत वर्कर को एक अलग पहचान संख्या और डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा, जो देशभर में मान्य होगा.
कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ी
एग्रीगेटर कंपनियों की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने साथ काम करने वाले सभी वर्कर्स का विवरण सरकारी पोर्टल पर अपडेट करें. इसमें थर्ड पार्टी या सहयोगी एजेंसियों के जरिए काम करने वाले वर्कर्स भी शामिल होंगे.
क्या-क्या लाभ मिलेंगे?
नए नियमों के तहत गिग वर्कर्स को स्वास्थ्य और जीवन बीमा, काम के दौरान दुर्घटना कवर और आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलने का प्रस्ताव है. भविष्य में पेंशन योजना लाने पर भी विचार किया जा रहा है.
पात्रता और निगरानी व्यवस्था
आपको बता दें कि 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद गिग वर्कर इन लाभों के पात्र नहीं होंगे. हर साल न्यूनतम कार्य दिवसों की शर्त पूरी करना जरूरी होगा. इन योजनाओं की निगरानी के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिसमें सरकार, कंपनियों और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
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