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नोटबंदी के बाद आय कर छूट की सीमा बढ़ा सकती है सरकार: SBI रिसर्च रिपोर्ट

नोटबंदी से हुए आर्थिक नुकसान को बचाने की कवायद, कई कर रियायतों की घोषणा कर सकती है सरकार

News Nation Bureau | Edited By : Shivani Bansal | Updated on: 24 Jan 2017, 04:03:11 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)

highlights

  • नोटबंदी के बाद डैमेज कंट्रोल के लिए तैयार सरकार इस बार आम बजट में आयकर छूट की घोषणा कर सकती है
  • नौकरी पेशा लोगों को बड़ी राहत देते हुए सरकार टैक्स स्लैब को मौजूदा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर सकती है

नई दिल्ली:

नोटबंदी के बाद डैमेज कंट्रोल के लिए तैयार सरकार इस बार आम बजट 2017 में करों में रियायतों की घोषणा कर सकती है। नौकरी पेशा लोगों को बड़ी राहत देते हुए सरकार टैक्स स्लैब में भी बढ़ोतरी कर सकती है।

देश की आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने के लिए सरकार प्रत्यक्ष करों में बड़े बदलाव कर सकती है। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा जारी एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार आयकर छूट सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जा सकता है। वहीं सरकार बैंक की 3 साल की फिक्सड डिपॉज़िट यानि सावधि जमा पर कर छूट दे सकती है। 

होम लोन की ब्याज पर मिलने वाली कर रियायत सीमा को 2 लाख से बढ़कर 3 लाख रुपये भी किया जा सकता है। स्टेट बैंक की रिसर्च रिपोर्ट 'इकोरैप' के अनुसार सरकार बजट 2017 में आयकर छूट सीमा भी बढ़ा सकती है। आयकर धारा 80सी के तहत विभिन्न निवेश और बचत पर मिलने वाली छूट सीमा को बढ़ाया जा सकता है।

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मुख्य आर्थिक सलाहकार और महाप्रबंधक आर्थिक शोध विभाग सौम्या कांती घोष द्वारा तैयार एसबीआई की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'इस तरह की छूट देने से सरकारी खजाने पर 35,300 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।'

रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार आय घोषणा योजना (आईडीएस) के तहत करीब 50,000 करोड़ रुपये की कर वसूली और नोटबंदी की वजह से निरस्त देनदारी के तौर पर करीब 75,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है।

वहीं, नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था को करारा झटका लगा है। नोटबंदी के बाद वित्त वर्ष 2016-17 की जीडीपी दर 7.1% रहने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2015-16 में 7.6% थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वित्त वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौतियां है।

इससे पहले हालांकि मोदी सरकार की तरफ से अगले बजट में आयकर छूट की सीमा को मौजूदा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये किए जाने की खबरों का सरकार ने खंडन कर दिया था।

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सरकार के प्रवक्ता फ्रैंक नरोन्हा ने इसका खंडन करते हुए कहा था, 'आयकर स्लैब को बढ़ाए जाने के बारे में मीडिया में चल रही खबरें मनगढंत और आधारहीन है।' खबरों के मुताबिक सरकार 4-10 लाख रुपये की आय सीमा पर 10 फीसदी का टैक्स जबकि सालाना 10-15 लाख रुपये की आय वालों पर 15 फीसदी टैक्स लगाए जाने के बारे में विचार कर रही थी।

तीसरा स्लैब 15-20 लाख रुपये की सालाना आय वाले समूहों का था जिससे 20 फीसदी टैक्स वसूले जाने के प्रस्ताव था जबकि सालाना 20 लाख रुपये से अधिक आमदनी वालों पर 30 फीसदी का टैक्स लगाए जाने की खबरे सामने आ रही थीं।

इससे पहले आयकर छूट की सीमा को दो लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये किया गया था। 2014-15 का बजट पेश करते हुए सरकार ने महिलाओं व पुरुषों के लिए आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दिया था।

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वहीं 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के बुजुर्गो के लिए यह सीमा तीन लाख रुपये कर दी गई है। पहले पुरुष एवं महिलाओं के लिए आयकर छूट सीमा दो लाख रुपये और बुजुर्गो के लिए 2.5 लाख रुपये थी।
बजट में आयकर छूट के लिए अधिकतम निवेश सीमा को भी बढ़ाने की घोषणा की गई। अब निवेश की सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दिया गया है।

गौरतलब है कि भाजपा ने चुनाव के दौरान आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर तीन लाख रुपये तक करने का वादा किया था।

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First Published : 23 Jan 2017, 06:28:00 PM