NPS को लेकर हुए दो बड़े बदलाव, कम होगी फीस, जानें और क्या-क्या?

NPS Changes: पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को अधिक मजबूत, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए दो बड़े और संरचनात्मक बदलावों का ऐलान किया है.

NPS Changes: पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को अधिक मजबूत, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए दो बड़े और संरचनात्मक बदलावों का ऐलान किया है.

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Dheeraj Sharma
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NPS Changes: पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को अधिक मजबूत, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए दो बड़े और संरचनात्मक बदलावों का ऐलान किया है. इन सुधारों का मकसद फंड मैनेजमेंट में भागीदारी बढ़ाना, निवेशकों को ज्यादा विकल्प देना और शुल्क ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है. यह बदलाव भारत की पेंशन व्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

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बैंकों को पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCB) स्वतंत्र रूप से NPS के तहत पेंशन फंड स्थापित कर सकेंगे. अब तक यह सुविधा सीमित संस्थानों तक ही थी, लेकिन नए फैसले से NPS निवेशकों को फंड चुनने के ज्यादा विकल्प मिलेंगे. इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और फंड मैनेजमेंट की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है.

हालांकि, PFRDA ने स्पष्ट किया है कि केवल वही बैंक पेंशन फंड स्थापित कर पाएंगे, जो पूंजी के लिहाज से मजबूत और वित्तीय रूप से स्थिर हों. इनकी पात्रता का आकलन RBI के मानदंडों, जैसे निवल संपत्ति, मार्केट कैपिटलाइजेशन और अन्य वित्तीय संकेतकों के आधार पर किया जाएगा। इससे सिस्टम की विश्वसनीयता बनी रहेगी.

शुल्क ढांचे में बड़ा बदलाव, निवेशकों को राहत

दूसरा अहम सुधार निवेश प्रबंधन शुल्क (IMF) से जुड़ा है. PFRDA ने IMF की नई संरचना को मंजूरी दी है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी. इसका उद्देश्य निवेशकों पर पड़ने वाले शुल्क को कम करना और भारत की पेंशन लागत संरचना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है.

नई नीति के तहत सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र के लिए अलग-अलग शुल्क ढांचा अपनाया गया है. सरकारी क्षेत्र के लिए मौजूदा दरें बरकरार रहेंगी, जबकि गैर-सरकारी क्षेत्र के लिए स्लैब आधारित डिफरेंशियल चार्ज लागू किया जाएगा.

स्लैब आधारित IMF संरचना

नई फीस व्यवस्था 

- 25,000 करोड़ रुपये तक AUM पर IMF: 0.12%

- 25,000 – 50,000 करोड़ रुपये पर IMF: 0.08%

- 50,000 – 1,50,000 करोड़ रुपये पर IMF: 0.06%

- 1,50,000 करोड़ रुपये से अधिक पर IMF: 0.04%

यह ढांचा मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क के तहत आने वाली सभी योजनाओं पर लागू होगा, जिसमें हर फंड का AUM अलग-अलग गिना जाएगा.

नियामक शुल्क और जागरूकता पर फोकस

सालाना नियामक शुल्क (ARF) को 0.015% पर अपरिवर्तित रखा गया है। इसमें से 0.0025% हिस्सा NPS मध्यस्थ संघ (ANI) को दिया जाएगा, जिसका उपयोग PFRDA के मार्गदर्शन में देशभर में पेंशन जागरूकता और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों के लिए किया जाएगा.

PFRDA अध्यक्ष का बयान

PFRDA के अध्यक्ष दीपक मोहंती ने इन सुधारों को भारत की पेंशन व्यवस्था में एक 'रणनीतिक विकास' बताया. उनके अनुसार, ये कदम एक अधिक प्रतिस्पर्धी, सुशासित और मजबूत NPS सिस्टम तैयार करेंगे, जो नए भारत की आर्थिक आकांक्षाओं के अनुरूप है और दीर्घकाल में निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा करेगा.

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