Toll Tax Rule: 15 फरवरी से इन टोल पर नहीं देना होगा टैक्स, नितिन गडकरी ने नियमों में किया बदलाव

Toll Tax Rule: देशभर में तेजी से बन रहे एक्सप्रेसवे ने लंबी दूरी की यात्रा को आसान और तेज बना दिया है. सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार निवेश कर रही है.

Toll Tax Rule: देशभर में तेजी से बन रहे एक्सप्रेसवे ने लंबी दूरी की यात्रा को आसान और तेज बना दिया है. सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार निवेश कर रही है.

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Dheeraj Sharma
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Toll Tax New Rule

Toll Tax Rule: देशभर में तेजी से बन रहे एक्सप्रेसवे ने लंबी दूरी की यात्रा को आसान और तेज बना दिया है. सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार निवेश कर रही है. लेकिन अब तक यात्रियों की एक बड़ी शिकायत यह थी कि एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार न होने के बावजूद उनसे पूरा और कई बार ज्यादा टोल वसूला जाता था. अब सरकार ने इस व्यवस्था में अहम बदलाव किया है. नितिन गडकरी ने बताया कि अब ऐसे टोल पर किसी भी यात्री टैक्स नहीं चुकाना होगा जो अधूरा है. 

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अधूरे प्रोजेक्ट पर नहीं वसूला जाएगा प्रीमियम टोल

नए नियम के तहत यदि कोई नेशनल एक्सप्रेसवे “एंड-टू-एंड” पूरी तरह शुरू नहीं हुआ है, तो उसके खुले हिस्से पर एक्सप्रेसवे की प्रीमियम दर से टोल नहीं लिया जाएगा. ऐसे मामलों में केवल नेशनल हाईवे की सामान्य दर से ही शुल्क वसूला जाएगा.

क्या था पहले नियम

बता दें कि इससे पहले नियम यह था कि एक्सप्रेसवे घोषित होते ही उस पर 25 प्रतिशत तक अधिक टोल लिया जा सकता था, भले ही सड़क का कुछ हिस्सा निर्माणाधीन हो. इससे यात्रियों को असुविधा के साथ अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता था.

नियमों में संशोधन से मिली राहत

सरकार ने यह बदलाव नेशनल हाईवे फीस (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में संशोधन करके किया है. नए प्रावधान के अनुसार, जब तक एक्सप्रेसवे पूरी लंबाई में चालू नहीं हो जाता, तब तक उसे प्रीमियम श्रेणी में नहीं माना जाएगा.

यह नियम 15 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा. यह व्यवस्था एक वर्ष तक या संबंधित एक्सप्रेसवे के पूर्ण रूप से चालू होने तक लागू रहेगी जो भी पहले हो.

यात्रियों और ट्रैफिक प्रबंधन को फायदा

सरकार का मानना है कि इस फैसले से लोग अधूरे लेकिन चालू हिस्सों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित होंगे. अभी तक कई वाहन चालक अतिरिक्त टोल से बचने के लिए पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों का इस्तेमाल करते थे, जिससे वहां भीड़ और जाम की समस्या बढ़ जाती थी.

नई व्यवस्था से ट्रैफिक का संतुलित वितरण संभव होगा, जिससे यात्रा समय कम होगा और ईंधन की बचत भी होगी। जाम घटने से प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है.

पारदर्शिता की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय टोल वसूली व्यवस्था में पारदर्शिता और न्यायसंगतता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का दबाव भी बढ़ेगा, क्योंकि प्रीमियम टोल की अनुमति तभी मिलेगी जब सड़क पूरी तरह तैयार होगी.

कुल मिलाकर, 15 फरवरी से लागू होने वाला यह बदलाव लाखों दैनिक यात्रियों और लंबी दूरी तय करने वालों के लिए राहत भरी खबर है, जो अधूरी सड़कों पर पूरा शुल्क चुकाने को लेकर लंबे समय से असंतोष जता रहे थे.

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