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केंद्र सरकार ने SIM-Binding नियम को लेकर अपना रुख लगभग साफ कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दूरसंचार विभाग (DoT) ने ओटीटी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि हर यूजर अकाउंट एक एक्टिव SIM से जुड़ा होना चाहिए. 1 मार्च की तय समय सीमा को देखते हुए सरकार किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं दिख रही है.
सरकार का तर्क है कि डिजिटल फ्रॉड, फर्जी नंबर और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए यह कदम जरूरी है. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा जा रहा है कि 'सुरक्षा पहले' की नीति के तहत SIM-Binding में बदलाव नहीं होगा.
क्या बदल जाएगा यूजर्स के लिए?
इस नियम का सबसे ज्यादा असर WhatsApp यूजर्स पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत में इसके करोड़ों सक्रिय उपयोगकर्ता हैं. अभी तक एक नंबर से कई डिवाइस पर WhatsApp चलाया जा सकता है, लेकिन सिम बाइंडिंग लागू होने के बाद यह सुविधा सीमित हो सकती है.
अगर जिस फोन नंबर से अकाउंट रजिस्टर है, वह SIM डिवाइस में मौजूद नहीं है, तो ऐप का उपयोग बाधित हो सकता है. वॉट्सएप वेब को हर कुछ घंटों में दोबारा वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ सकती है. मौजूदा व्यवस्था में लिंक्ड डिवाइस 14 दिनों तक सक्रिय रह सकता है, लेकिन नए नियम के बाद बार-बार सत्यापन अनिवार्य हो सकता है.
छोटे कारोबार पर संभावित असर
छोटे और मध्यम व्यवसाय, जो ग्राहक सेवा और ऑर्डर मैनेजमेंट के लिए वॉट्सएप पर निर्भर हैं, उन्हें संचालन में दिक्कत आ सकती है. रिपोर्ट्स में अनुमान है कि 60 से 80 प्रतिशत छोटे बिजनेस शुरुआती दौर में ऑपरेशनल डिसरप्शन का सामना कर सकते हैं.
जो यूजर एक ही नंबर को कई डिवाइस पर इस्तेमाल करते हैं या बार-बार SIM बदलते हैं, वे सीधे तौर पर प्रभावित होंगे.
सिर्फ WhatsApp नहीं, अन्य ऐप्स भी दायरे में
यह नीति केवल वॉट्सएप तक सीमित नहीं है. इसके अलावा Telegram और Signal जैसे अन्य मैसेजिंग ऐप्स भी SIM-Binding नियम के दायरे में बताए जा रहे हैं. इसका मतलब है कि यह बदलाव पूरे डिजिटल कम्युनिकेशन इकोसिस्टम को प्रभावित कर सकता है.
टेक कंपनियों की आपत्ति
कुछ अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों और इंडस्ट्री समूहों ने इस नियम पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि यह प्राइवेसी और कानूनी दायरे से जुड़े सवाल खड़े कर सकता है. हालांकि सरकार का रुख फिलहाल सख्त दिखाई दे रहा है और नियम को वापस लेने के संकेत नहीं मिले हैं.
तकनीकी बदलाव पर नजर
1 मार्च की डेडलाइन के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी. अभी तक आम यूजर्स के लिए कोई अलग सार्वजनिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, लेकिन संकेत साफ हैं कि एक्टिव SIM के बिना मैसेजिंग ऐप्स चलाना मुश्किल हो सकता है.
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि तकनीकी बदलाव किस रूप में लागू होते हैं और करोड़ों भारतीय यूजर्स के डिजिटल अनुभव पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है.
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