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एक्सीडेंट न्यूज Photograph: (Freepik)
आज हम जिस योजना की बात कर रहे हैं, वह सीधे तौर पर इंसान की जिंदगी बचाने से जुड़ी है. अक्सर सड़क पर होने वाले हादसों में मौत का सबसे बड़ा कारण यह होता है कि घायल को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता. लोग डरते हैं कि अस्पताल वाले पहले पैसे मांगेंगे और अगर उनके पास पैसे नहीं हुए, तो क्या होगा? इसी डर को दूर करने के लिए सरकार ने 'पीएम राहत योजना' की शुरुआत की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि पैसों की कमी की वजह से किसी भी एक्सीडेंट के शिकार व्यक्ति की जान न जाए. अब आप बिना अपनी जेब की फिक्र किए किसी भी घायल की जान बचा सकते हैं.
इलाज के लिए मिलेंगे डेढ़ लाख रुपये
अब सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि इस योजना के तहत कितनी मदद मिलती है? तो आपको बता दें कि पीएम राहत योजना के जरिए सड़क हादसे में घायल इंसान को डेढ़ लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है. सरकार ने तय किया है कि हादसे के बाद के जो शुरुआती 7 दिन होते हैं, उनमें जो भी खर्च आएगा, उसे सरकार खुद वहन करेगी. चाहे वह दवाइयों का खर्च हो, डॉक्टर की फीस हो या फिर जरूरी जांचें, डेढ़ लाख रुपये तक की सीमा में आपको कुछ भी देने की जरूरत नहीं है. यह नियम इसलिए बनाया गया है क्योंकि एक्सीडेंट के शुरुआती कुछ दिन ही सबसे ज्यादा नाजुक होते हैं और उसी समय सबसे ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ती है.
बिना पैसे दिए होगा काम
इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से 'कैशलेस' है. यानी आपको अस्पताल में भर्ती होते समय अपनी जेब से एक पैसा भी निकालने की जरूरत नहीं है. अक्सर हम देखते हैं कि प्राइवेट अस्पताल वाले कहते हैं कि "पहले इतने पैसे जमा करो, तभी हम इलाज शुरू करेंगे." लेकिन इस योजना के तहत अस्पताल आपसे पहले पैसे नहीं मांग सकता. आपको बस घायल को वहां पहुंचाना है और अस्पताल को बताना है कि यह केस पीएम राहत योजना के तहत आता है. इसके बाद अस्पताल की जिम्मेदारी है कि वह तुरंत इलाज शुरू करे. पैसों के लेन-देन की जो भी प्रक्रिया होगी, वह सरकार और अस्पताल के बीच होगी, आपको इसमें बीच में पड़ने की जरूरत नहीं है.
इमरजेंसी में तुरंत इलाज शुरू करना होगा
एक्सीडेंट के मामलों में हर एक सेकंड कीमती होता है. इसी को समझते हुए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं. अगर किसी व्यक्ति की हालत बहुत ज्यादा खराब है और उसकी जान खतरे में है, तो अस्पताल को पहले 48 घंटों के भीतर उसे स्टेबल (हालत स्थिर) करने के लिए तुरंत काम शुरू करना होगा. डॉक्टर यह बहाना नहीं बना सकते कि अभी कागज तैयार नहीं हैं या पुलिस नहीं आई है. वहीं, अगर चोट थोड़ी कम है, तो भी 24 घंटे के अंदर पूरा इलाज मिलना तय है. यह नियम इसलिए है ताकि अस्पताल कागजी कार्रवाई के नाम पर कीमती समय बर्बाद न करें.
हादसा होने पर तुरंत करें ये काम
अब आप सोच रहे होंगे कि अगर सड़क पर हादसा देख लें, तो मदद की शुरुआत कैसे करें? इसके लिए कोई बहुत बड़ा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले 112 नंबर पर कॉल करें और जानकारी दें. इसके बाद घायल को पास के किसी भी सरकारी अस्पताल या उस प्राइवेट अस्पताल में ले जाएं जो सरकार की लिस्ट में शामिल हो. वहां पहुंचते ही अस्पताल के कर्मचारी खुद ही अपने कंप्यूटर पोर्टल पर मरीज का नाम और हादसे की जगह जैसी जानकारियां भर देंगे. बस इतना ही काम आपको करना है, बाकी सारा काम अस्पताल और सरकार का सिस्टम संभाल लेगा.
नहीं रुकेगा इलाज
एक और बड़ा डर लोगों के मन में रहता है कि अगर हमारे पास उस समय आधार कार्ड या कोई पहचान पत्र नहीं हुआ, तो क्या इलाज मिलेगा? सरकार ने इस पर बहुत साफ और सख्त निर्देश दिए हैं. अगर आपके पास कोई कागज है, तो अच्छी बात है, उसे दे दें. लेकिन अगर कोई भी पहचान पत्र नहीं है, तो भी अस्पताल इलाज करने से मना बिल्कुल नहीं कर सकता. जान बचाना सबसे पहला और सबसे जरूरी काम है। पहचान की कागजी कार्रवाई बाद में भी आराम से की जा सकती है. इसलिए अगर आपके पास कागज नहीं हैं, तो भी बिना डरे मदद के लिए आगे आएं.
जानिए कहां से आता है इस मुफ्त इलाज के लिए पैसा
आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि सरकार इतने लोगों का मुफ्त इलाज आखिर कैसे कर पाएगी? इसके लिए सरकार ने एक अलग फंड बनाया है, जिसे 'मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड' (MVAF) कहते हैं. हम जब भी अपनी गाड़ी का बीमा (Insurance) करवाते हैं या सड़क का टैक्स देते हैं, उसका एक छोटा सा हिस्सा इस फंड में जमा होता है. इसी फंड से सरकार अस्पतालों को पैसे देती है. अगर जिस गाड़ी से एक्सीडेंट हुआ है उसका बीमा है, तो बीमा कंपनी भी इसमें अपना हिस्सा देती है. यह सारा काम ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से होता है ताकि किसी भी तरह की धांधली न हो सके और पैसा सीधे सही जगह पहुंच सके.
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