जहां युद्ध ने दुनिया भर में हिला डाला बाजार का गणित, वहीं इस देश के शेयरों में लगी रॉकेट की रफ्तार

Iran Israel War Impact: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच वैश्विक बाजारों में गिरावट, लेकिन इस देश के शेयर बाजार में तेल कंपनियों के दम पर जोरदार तेजी.

Iran Israel War Impact: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच वैश्विक बाजारों में गिरावट, लेकिन इस देश के शेयर बाजार में तेल कंपनियों के दम पर जोरदार तेजी.

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Yashodhan Sharma
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प्रेसिडेंट पुतिन Photograph: (X/ANI)

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में जबरदस्त उथल-पुथल मचा दी है. मध्य पूर्व में हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. वित्तीय अस्थिरता को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 2 और 3 मार्च 2026 को अपने शेयर बाजार बंद रखने का फैसला किया. अमेरिका, चीन, जापान और भारत समेत कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई.

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कच्चे तेल पर तनाव का सबसे बड़ा असर

तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल पर पड़ा है. ईरान के ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब की अरामको ने एहतियातन रास तनुरा रिफाइनरी को बंद कर दिया, जो देश की सबसे बड़ी और रणनीतिक ऊर्जा साइट्स में से एक है. इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 15% की उछाल आई और यह लगभग 79.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता देखा गया. विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.

दबाव के बीच ये देश दिखा रहा मजबूती

जहां एक ओर दुनिया भर के बाजार दबाव में हैं, वहीं रूस का शेयर बाजार मजबूती दिखा रहा है. मॉस्को एक्सचेंज (MOEX) में 2 मार्च को करीब 1.50% की तेजी देखी गई. खासतौर पर ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल रहा. Rosneft में लगभग 6%, Novatek में 3%, Lukoil में 2%, Gazprom में 1% और Tatneft में करीब 3.5% की तेजी दर्ज की गई. निवेशकों को उम्मीद है कि यदि खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति बाधित होती है तो रूस एक वैकल्पिक सप्लायर के रूप में उभर सकता है. वर्ष 2025 में रूस ने लगभग 238 मिलियन टन तेल निर्यात किया था, जिसमें से 80% चीन और भारत को गया.

विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

तनाव की जड़ में Strait of Hormuz भी है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम समुद्री मार्ग है. यदि यहां टैंकर यातायात बाधित होता है तो आपूर्ति संकट और गहरा सकता है. विशेषज्ञों ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि महंगा तेल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है.

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