GPF राशि निकालने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, अब नॉमिनी को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र दिखाने की जरूरत नहीं

GPF Update: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैध नॉमिनी को पूरी GPF राशि मिलेगी, इसके लिए कोई कानूनी प्रमाण पत्र जरूरी नहीं. आइए जानते हैं क्या है ये नया फैसला.

GPF Update: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैध नॉमिनी को पूरी GPF राशि मिलेगी, इसके लिए कोई कानूनी प्रमाण पत्र जरूरी नहीं. आइए जानते हैं क्या है ये नया फैसला.

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Yashodhan Sharma
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भोजपुर मामले पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी Photograph: (Social Media)

GPF Update: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी ने अपने GPF खाते के लिए वैध नॉमिनी (नामित व्यक्ति) बनाया है, तो कर्मचारी की मौत के बाद पूरी GPF राशि उसी नॉमिनी को दी जाएगी. इसके लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, प्रोबेट या लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन दिखाने की जरूरत नहीं होगी, भले ही राशि 5,000 रुपये से ज्यादा क्यों न हो.

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इसलिए आया ये फैसला

यह फैसला जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने दिया. बेंच केंद्र सरकार की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जो कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई थी. हाईकोर्ट ने एक मृत सरकारी कर्मचारी के भाई के पक्ष में फैसला दिया था, जिसे कर्मचारी ने अपने GPF का एकमात्र नॉमिनी बनाया था.

आज 5 हजार का कोई महत्व नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नॉमिनेशन की प्रक्रिया का एक विशेष महत्व और पवित्रता होती है. अगर वैध नॉमिनी होते हुए भी उससे कानूनी दस्तावेज मांगे जाएंगे, तो नॉमिनेशन का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि 1925 में जब प्रोविडेंट फंड एक्ट बना था, तब 5,000 रुपये एक बड़ी रकम हुआ करती थी, लेकिन आज के समय में महंगाई के कारण इसका कोई महत्व नहीं रह गया है.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नॉमिनी केवल राशि प्राप्त करने का हकदार होता है, वह इसका अंतिम मालिक नहीं होता. अगर किसी अन्य कानूनी वारिस को राशि पर दावा करना है, तो वह सक्षम अदालत में जाकर नॉमिनी से अपना हिस्सा मांग सकता है.

सरकार को इन विवादों से रहना होगा दूर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को मृत कर्मचारी की संपत्ति से जुड़े निजी विवादों में नहीं पड़ना चाहिए. अगर हर मामले में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की शर्त लगाई जाएगी, तो सरकार को अनावश्यक मुकदमों में उलझना पड़ेगा.

क्या है 1960 का नियम 33 

कोर्ट ने यह भी कहा कि जनरल प्रोविडेंट फंड (सेंट्रल सर्विसेज) नियम, 1960 का नियम 33 साफ तौर पर बताता है कि वैध नॉमिनेशन होने पर पूरी राशि नॉमिनी को दी जाएगी. इस नियम को सरकार ने खुद बनाया है और इसे चुनौती भी नहीं दी गई है. इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी.

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