सूडान में जारी गृहयुद्ध में महिलाएं बड़ी संख्या में बन रहीं शिकार, यौन हिंसा के मामले सबसे ज्यादा

सूडान में जारी गृहयुद्ध में महिलाएं बड़ी संख्या में बन रहीं शिकार, यौन हिंसा के मामले सबसे ज्यादा

सूडान में जारी गृहयुद्ध में महिलाएं बड़ी संख्या में बन रहीं शिकार, यौन हिंसा के मामले सबसे ज्यादा

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IANS
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Delhi Crime: 7-yr-old sexually assaulted by 50-year-old neighbour

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। सूडान में दो साल से भी ज्यादा लंबे समय से गृह युद्ध छिड़ा हुआ है, लेकिन इस लड़ाई में औरतें सबसे ज्यादा शोषण का शिकार हैं। सूडान की महिलाओं को दुनिया की सबसे बुरी यौन हिंसा और दूसरे जुर्मों का सामना करना पड़ रहा है। यह जानकारी सेना के समर्थन वाली सरकार की सामाजिक मामलों की मंत्री बनी एक कार्यकर्ता सुलेमा इसहाक अल-खलीफा ने दी है।

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सूडान की सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) अप्रैल 2023 से एक भयानक लड़ाई में उलझी हुई हैं। इस गृहयुद्ध में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं, लगभग 1.10 करोड़ लोग बेघर हुए और बड़े पैमाने पर यौन हिंसा हुई है।

सुलेमा इसहाक अल-खलीफा ने कहा कि औरतों के साथ बुरा बर्ताव नियमित तौर पर लूटपाट और हमलों के साथ होता है। पोर्ट सूडान में ट्रेंड साइकोलॉजिस्ट ने कहा, महिलाओं के साथ जो यौन हिंसा हो रही है, उसमें कोई उम्र की लिमिट नहीं है। 85 साल की औरत से दुष्कर्म हो सकता है, एक साल की बच्ची भी सुरक्षित नहीं है।

लंबे समय से महिला अधिकारों के लिए काम कर रही कार्यकर्ता ने कहा कि महिलाओं को सेक्सुअल स्लेवरी (यौन दासों) का शिकार बनाया जा रहा है और पड़ोसी देशों में उनकी तस्करी की जा रही है। इसके साथ ही उनकी जबरदस्ती शादियां भी करवाई जा रही हैं।

खलीफा ने कहा कि दोनों तरफ से यौन हिंसा की खबरें आई हैं। उनके मंत्रालय ने अप्रैल 2023 और अक्टूबर 2025 के बीच 1,800 से ज्यादा दुष्कर्म के मामले दस्तावेज में दर्ज किए हैं। इस आंकड़े में अक्टूबर के आखिर से पश्चिमी दारफुर और पड़ोसी कोर्डोफन इलाके में डॉक्यूमेंट किए गए अत्याचार शामिल नहीं हैं।

खलीफा ने कहा, यह लोगों को बेइज्जत करने, उन्हें उनके घर, जगह और शहर छोड़ने के लिए मजबूर करने और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने के बारे में है।

एक कार्यकर्ता समूह और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में महिलाओं के खिलाफ होने वाले गलत कामों को डॉक्यूमेंट करने वाली रिपोर्ट में पाया गया कि रिकॉर्ड किए गए तीन-चौथाई से ज्यादा मामले दुष्कर्म के थे, जिसमें से 87 फीसदी आरएसएफ से जुड़े थे।

संयुक्त राष्ट्र ने दारफुर में गैर-अरब समुदायों पर टारगेटेड हमलों को लेकर बार-बार चिंता जताई है। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) ने दोनों तरफ से किए गए युद्ध अपराधों की औपचारिक जांच शुरू कर दी है।

यूएन सिक्योरिटी काउंसिल को आईसीसी के डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नजहत शमीम खान ने कहा कि इन्वेस्टिगेटर को एल फशेर में एक सोचे-समझे कैंपेन के सबूत मिले हैं। यह दारफुर में आर्मी का आखिरी गढ़ था, जिस पर आरएसएफ ने अक्टूबर के आखिर में कब्जा कर लिया था।

उन्होंने आगे कहा कि इस कैंपेन में बड़े पैमाने पर सामूहिक दुष्कर्म और फांसी शामिल थी, कभी-कभी अपराधियों ने इसे फिल्माया और सेलिब्रेट किया और पूरी तरह से सजा से बचने की भावना से इसे हवा दी।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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