CM ममता ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लिया एक्शन, ये है बवाल

West Bengal: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं. उन्होंने चुनाव आयोग पर नियम उल्लंघन और मानवाधिकार अनदेखी के आरोप लगाए. आइए जानते हैं क्यों हो रहा ये बवाल.

West Bengal: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं. उन्होंने चुनाव आयोग पर नियम उल्लंघन और मानवाधिकार अनदेखी के आरोप लगाए. आइए जानते हैं क्यों हो रहा ये बवाल.

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Yashodhan Sharma
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West Bengal News

सीएम ममता बनर्जी (फाइल फोटो) Photograph: (X/@ani)

West Bengal News: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन यानी SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. अब इस मामले में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं. इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के सांसद डोला सेन और डेरेक ओब्रायन भी इस प्रक्रिया के खिलाफ याचिका दाखिल कर चुके हैं. इन याचिकाओं पर 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है. ममता बनर्जी की याचिका पर भी उसी दिन सुनवाई हो सकती है.

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ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को लिखा था पत्रा

इससे पहले ममता बनर्जी ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखा था. यह पत्र उन्होंने शनिवार शाम को भेजा, जिसमें पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई. ममता ने अपने पहले लिखे गए पत्रों का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है.

लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा

मुख्यमंत्री का दावा है कि SIR के दौरान लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा, जरूरी दस्तावेजों की मांग की गई और कई जगहों पर अव्यवस्था रही. उन्होंने आरोप लगाया कि इन सब कारणों से राज्य में अब तक करीब 140 लोगों की मौत हो चुकी है.

मानवाधिकारों की हो रही अनदेखी

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन करते हुए लागू किया गया है. उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया मानवाधिकारों और बुनियादी मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी करते हुए चलाई जा रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में लगभग 8,100 माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए हैं, जो भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार हुआ है.

पर्यवेक्षकों को नहीं दिया गया प्रशिक्षण

ममता का कहना है कि इन पर्यवेक्षकों को न तो पर्याप्त प्रशिक्षण दिया गया है और न ही उन्हें इस तरह की संवेदनशील और अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया का अनुभव है. उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया एकतरफा ढंग से लागू की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और आम नागरिकों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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