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शारदा चिटफंड घोटाले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने देबजानी मुखर्जी को दी जमानत

पश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड घोटाले में सहआरोपी देबयानी मुखर्जी को आज कलकत्ता हाईकोर्ट से जमानत मिल गई. हालांकि इसके बावजूद भी देबयानी महिला सुधार गृह से रिहा नहीं हो पाएंगी.

News Nation Bureau | Edited By : Shailendra Kumar | Updated on: 19 Jun 2021, 07:32:21 PM
Calcutta High Court

शारदा चिटफंड घोटाले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने देबजानी मुखर्जी को दी बेल (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • शारदा चिटफंड घोटाला
  • कलकत्ता हाईकोर्ट से देबजानी मुखर्जी को मिली बेल
  • दो अन्य मामलों की वजह से अभी जेल में ही रहना होगा

कोलकाता:

पश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड घोटाले में सहआरोपी देबयानी मुखर्जी को आज कलकत्ता हाईकोर्ट से जमानत मिल गई. हालांकि इसके बावजूद भी देबयानी महिला सुधार गृह से रिहा नहीं हो पाएंगी. इसका कारण यह है कि उनके ओडिशा और झारखंड में भी कई मामले दर्ज हैं. शारदा कंपनी के प्रमोटर सुदीप्त सेन और देबजानी मुखर्जी को 2013 में कश्मीर के सोनमर्ग से गिरफ्तार किया गया था. शारदा कंपनी ने बंगाल में कई पोंजी स्कीम चलाई थी, जिसमें लाखों लोगों के साथ हजारों-करोड़ों रुपए डूब गए. इस केस की जांच सीबीआई कर रही है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शारदा चिटफंड घोटाले में देबयानी मुखर्जी को शारदा ग्रुप के प्रमोटर सुदीप्त सेन के साथ सह आरोपी बनाया गया था. दोनों को 2013 में कश्मीर के सोनमर्ग से गिरफ्तार किया गया था. शारदा कंपनी ने बंगाल में पोंजी स्कीम्स चलाकर लाखों लोगों के साथ फ्रॉड किया था. पिछले साल सीबीआई ने दावा किया था कि इस घोटाले के तार सीएम रिलीफ फंड से भी जुड़े हैं.

दावे के मुताबिक सीएम रिलीफ फंड की ओर से शारदा ग्रुप की ही एक कंपनी तारा टीवी को करीब 6.21 करोड़ रुपये दिए गए थे, जिसका इस्तेमाल बाद में कंपनी के कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए किया गया था. इस मामले में देबयानी को गिरफ्तार करने के बाद अलीपुर के महिला सुधार गृह में रखा गया है. आज कलकत्ता हाईकोर्ट ने देबयानी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे जमानत दे दी. खबरों की मानें तो देबयानी पर ओडिशा और झारखंड में भी कई मामले दर्ज हैं, लिहाजा उन्हें अलीपुर के महिला सुधार गृह में ही रहना पड़ेगा.

2009 में बंगाल के राजनीतिक गलियारों में शारदा ग्रुप के कथित धोखाधड़ी की चर्चा होने लगी. 2012 में सेबी की नजर इस ग्रुप पर पड़ी और फौरन इस तरह की जमा स्कीमों को बंद करने को कहा गया. 2013 में अचानक स्कीम बंद कर दी गई. 18 पन्नों का लेटर लिखकर सुदीप्तो ने कई नेताओं पर पैसे हड़पने को इसके पीछे वजह बताया. 20 अप्रैल 2013 को सुदीप्तो को गिरफ्तार कर लिया गया. शारदा ग्रुप का बिजनेस पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड, ओडिशा और त्रिपुरा तक में फैला हुआ था. 2014 में सीबीआई को मामले की जांच सौंपी गई. सीबीआई ने मामले में कुल 46 एफआईआर दर्ज की थीं जिसमें से 3 पश्चिम बंगाल और 43 ओडिशा में दर्ज हुई थीं. झारखंड में भी कुछ मामले दर्ज हैं.

First Published : 19 Jun 2021, 06:15:49 PM

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