बंगाल चुनाव से पहले बुलेट सौगात! वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मिली सबसे ज़्यादा प्राथमिकता

पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने राज्य को बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सौगात देने की तैयारी तेज कर दी है। रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड ने देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने राज्य को बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सौगात देने की तैयारी तेज कर दी है। रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड ने देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

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Syyed Aamir Husain
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West Bengal Rail Coridore

पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने राज्य को बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सौगात देने की तैयारी तेज कर दी है। रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड ने देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इनमें वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर को सबसे ऊपर रखा गया है, ताकि बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर को जोड़ने वाला ये रूट जल्द धरातल पर उतरे।

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रेलवे बोर्ड ने नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को साफ कहा है कि जिन कॉरिडोर की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार है, उन्हें अपडेट कर मौजूदा लागत, निर्माण खर्च और रिटर्न (EIRR/FIRR) के हिसाब से तुरंत आगे बढ़ाया जाए। साथ ही वाराणसी-सिलीगुड़ी की डीपीआर को सबसे पहले तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

ये हैं 7 प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर

मुंबई-पुणे
पुणे-हैदराबाद
हैदराबाद-बेंगलुरु
हैदराबाद-चेन्नई
चेन्नई-बेंगलुरु
दिल्ली-वाराणसी
वाराणसी-सिलीगुड़ी

सूत्रों के मुताबिक, प्राथमिकता क्रम इस तरह बन रहा है:

पहला फोकस: वाराणसी-सिलीगुड़ी

पश्चिम बंगाल में चुनाव को देखते हुए केंद्र सरकार इस कॉरिडोर को सबसे आगे बढ़ाना चाहती है। ये रूट उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को सीधे जोड़ते हुए सिलीगुड़ी के ज़रिये पूर्वोत्तर तक तेज़ कनेक्टिविटी देगा। इससे पर्यटन, व्यापार और सामरिक आवाजाही तीनों को बड़ा फायदा होगा।

-दिल्ली-वाराणसी

राजधानी से पूर्वांचल तक हाई-स्पीड कनेक्शन पहले से राजनीतिक और आर्थिक रूप से अहम है। इसकी डीपीआर पहले से काफी आगे है, इसलिए इसे भी जल्दी शुरू करने की तैयारी है।

-मुंबई-पुणे

देश का सबसे व्यस्त इंडस्ट्रियल बेल्ट। यहां ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है, इसलिए इस रूट पर भी तेज़ी से काम की संभावना है।

-दक्षिण भारत के कॉरिडोर

पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई और चेन्नई-बेंगलुरु पर एक साथ तैयारी होगी, लेकिन इनका निर्माण चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा।

मैदान में उतरेगी कोर टीम

NHSRCL को हर प्रोजेक्ट के लिए फील्ड में कोर टीम तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पूरे देश में हाई-स्पीड रेल के लिए एक जैसा तकनीकी स्टैंडर्ड तैयार किया जाएगा। मैनपावर ट्रेनिंग, प्री-कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी और कॉन्ट्रैक्ट डॉक्यूमेंट्स भी तुरंत शुरू होंगे।

बंगाल के लिए क्यों खास है वाराणसी-सिलीगुड़ी?

  • उत्तर भारत से बंगाल और पूर्वोत्तर की दूरी घटेगी
  • पर्यटन दार्जिलिंग, सिक्किम,असम को बढ़ावा
  • व्यापार और लॉजिस्टिक्स में तेजी सामरिक और सुरक्षा दृष्टि से मजबूत कनेक्टिविटी

कुल मिलाकर, चुनावी माहौल में केंद्र सरकार बंगाल को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का संदेश देना चाहती है और वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर उसी रणनीति का सबसे बड़ा चेहरा बनता दिख रहा है।

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