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Mamata Banerjee on SIR Photograph: (NN)
Kolkata: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ही पूरी ताकत से तैयारियों में जुटी हैं. इसी बीच राज्य सरकार ने 1 से 4 सितंबर तक विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है. माना जा रहा है कि इस दौरान भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों पर कथित अत्याचार और चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर प्रस्ताव लाया जा सकता है.
क्या है एसआईआर और क्यों हो रहा विरोध?
चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है. विपक्षी दलों का आरोप है कि इस अभियान के तहत 65 लाख से ज्यादा लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिससे लाखों मतदाताओं के अधिकार पर खतरा मंडरा रहा है. विपक्ष इसे 'वोट चोरी' की साजिश बता रहा है. अब आशंका जताई जा रही है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यही प्रक्रिया बंगाल में भी लागू की जा सकती है. इसी वजह से ममता बनर्जी सरकार विधानसभा में एसआईआर का विरोध दर्ज कराना चाहती है.
सेंसर मोशन का मतलब और प्रक्रिया
विधानसभा में सेंसर मोशन एक औपचारिक प्रस्ताव होता है, जिसे किसी खास विषय पर चर्चा या तुरंत कार्रवाई के लिए लाया जाता है. इसके तहत सदस्य किसी गंभीर मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हैं. अगर प्रस्ताव पर सहमति बनती है तो उस पर चर्चा होती है और जरूरत पड़ने पर वोटिंग भी कराई जाती है. माना जा रहा है कि टीएमसी इस बार एसआईआर के खिलाफ सेंसर मोशन लाकर विपक्षी दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश करेगी.
ममता बनर्जी का हमला और श्रमश्री योजना
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले भी भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों पर हो रहे कथित अत्याचार का मुद्दा उठा चुकी हैं. उन्होंने प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए 'श्रमश्री योजना' शुरू की है, जिसके तहत मजदूरों को मासिक आर्थिक सहायता दी जाती है.
विपक्षी एकजुटता और राहुल गांधी का हमला
इसी बीच कांग्रेस की 'वोटर अधिकार यात्रा' भी सुर्खियों में है. सिवान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर मिलकर लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप लगाया. इस यात्रा में अब तक डीएमके नेता एम.के. स्टालिन, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और कई कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो चुके हैं.
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने अखिलेश यादव के शामिल होने पर कहा कि लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में वे मजबूत साथी साबित होंगे.
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