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योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश Photograph: (X@myogiadityanath)
प्रदेश के जिन तहसीलों में एक से अधिक उपनिबंधक कार्यालय संचालित हो रहे हैं, वहां अब रविवार को भी रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध होगी. स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने नई व्यवस्था लागू करते हुए कार्यालयों के रोस्टर में अहम परिवर्तन किए हैं. विभाग की महानिरीक्षक नेहा शर्मा की ओर से जारी शासनादेश के बाद यह नई व्यवस्था प्रभावी हो गई है.
इस निर्णय को आम लोगों, खासकर नौकरीपेशा और दूर-दराज से आने वाले नागरिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
क्यों जरूरी था बदलाव?
पिछले कुछ समय से रजिस्ट्री कार्यालयों के कार्य समय में बदलाव की मांग उठ रही थी. कई लोग दूसरे जिलों और राज्यों से संपत्ति पंजीकरण के लिए आते हैं. रविवार को अवकाश होने के कारण उन्हें अतिरिक्त छुट्टी लेनी पड़ती थी. इसके अलावा आधार की अनिवार्यता के बाद पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सरकारी विकास योजनाओं के तहत भूमि क्रय के मामलों में भी वृद्धि हुई है. संबंधित विभागों के अधिकारी अक्सर शाम छह बजे के बाद ही उपनिबंधक कार्यालय पहुंच पाते थे. ऐसे में समय विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी.
लखनऊ में नई व्यवस्था कैसे होगी लागू?
लखनऊ की सदर तहसील में पांच उपनिबंधक कार्यालय संचालित हैं. यहां नई रोस्टर व्यवस्था के तहत एक कार्यालय दोपहर एक बजे से रात आठ बजे तक खुला रहेगा. ऑनलाइन अपॉइंटमेंट दोपहर एक बजे से शाम सात बजे तक लिया जा सकेगा.
लखनऊ के सहायक आयुक्त स्टांप द्वितीय रमेश कुमार ने बताया कि बाकी कार्यालय पहले की तरह सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक कार्य करेंगे.
सदर तहसील में रोस्टर के आधार पर एक कार्यालय रविवार को भी सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक खुलेगा. जिस कार्यालय को रविवार को खोला जाएगा, उसे अगले शनिवार अवकाश दिया जाएगा. यदि माह का द्वितीय शनिवार पड़ता है, तो उस स्थिति में संबंधित कार्यालय शुक्रवार को बंद रहेगा.
अन्य तहसीलों में क्या रहेगा प्रावधान?
लखनऊ की सरोजनीनगर और मोहनलालगंज तहसीलों में भी एक से अधिक उपनिबंधक कार्यालय होने के कारण यह नई व्यवस्था लागू होगी. हालांकि बख्शी का तालाब और मलिहाबाद तहसीलों में केवल एक-एक उपनिबंधक कार्यालय है, इसलिए वहां पहले की तरह पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी.
नई रोस्टर प्रणाली से पंजीकरण सेवाएं अधिक सुगम, पारदर्शी और नागरिक अनुकूल बनने की उम्मीद है. यह कदम प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
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