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योगी आदित्यनाथ Photograph: (Social Media)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने रूफटॉप सोलर को जन-आंदोलन का रूप दे दिया है. प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन ने राज्य को सौर ऊर्जा विस्तार में अग्रणी बना दिया है. ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की मिसाल बन चुका है.
राष्ट्रीय पोर्टल के अनुसार प्रदेश में अब तक 11.64 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3.93 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूरे हो चुके हैं. लगभग चार लाख परिवार सीधे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं. राज्य की कुल स्थापित सौर क्षमता 1,343.5 मेगावाट तक पहुंच चुकी है.
3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी सीधे खातों में
योजना के तहत केंद्र सरकार की 2,663.57 करोड़ और राज्य सरकार की लगभग 920 करोड़ की सब्सिडी लाभार्थियों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भेजी गई है. इससे पारदर्शिता बढ़ी है और आम लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है.
जुलाई 2025 से उत्तर प्रदेश लगातार इंस्टॉलेशन के मामले में देश के शीर्ष दो राज्यों में बना हुआ है, जो मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति और त्वरित क्रियान्वयन को दर्शाता है.
फरवरी 2026: रिकॉर्ड उपलब्धियों का महीना
यूपीनेडा के अनुसार फरवरी 2026 ऐतिहासिक रहा। एक ही महीने में 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए गए. 28 फरवरी 2026 को एक दिन में 2,211 इंस्टॉलेशन कर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड बनाया. यह उपलब्धि मिशन मोड में चल रहे अभियान की गति को दर्शाती है.
राज्य में प्रतिदिन औसतन 4 से 5 मेगावाट सौर क्षमता जोड़ी जा रही है, जिससे 20-25 करोड़ का दैनिक कारोबार उत्पन्न हो रहा है.
रोजगार और सौर अर्थव्यवस्था का विस्तार
योजना ने प्रदेश में सौर ऊर्जा आधारित नई अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है. 4,500 से अधिक वेंडर्स सक्रिय हैं और 60,000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है.
रूफटॉप सोलर से प्रतिदिन 60 लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसकी अनुमानित आर्थिक कीमत करीब 4 करोड़ प्रतिदिन है. इससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में भारी कमी आ रही है.
भूमि संरक्षण और पर्यावरण लाभ
रूफटॉप मॉडल का बड़ा लाभ भूमि संरक्षण है. 1,343 मेगावाट से अधिक क्षमता यदि ग्राउंड-माउंटेड प्लांट से स्थापित होती, तो हजारों एकड़ भूमि की आवश्यकता होती. इस मॉडल से 5,000 एकड़ से अधिक जमीन बचाई गई है, जो अन्य विकास कार्यों के लिए उपलब्ध है.
सौर ऊर्जा के विस्तार से कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आई है. अब राज्य डिजिटल ऊर्जा व्यापार मॉडल की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है, जिससे भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और निवेश की नई संभावनाएं खुलेंगी.
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