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CM Yogi (ANI)
उत्तर प्रदेश के 47,816 कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. ये वे कर्मचारी हैं, जिन्होंने अब तक चल-अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है. संपत्ति का ब्योरा देने की अंतिम तारीख 31 जनवरी थी. मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति न बताने वाले कर्मियों की इस महीने की सैलरी रोक दी गई है. साथ ही उनके प्रमोशन पर भी रोक लगाई जाएगी.
उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत राज्य सरकार के हर एक कर्मचारी को पिछले साल तक की अपनी चल-अचल संपत्ति का सालाना ब्योरा देना था. उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि सभी कर्मचारी 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति का ब्योरा दे दें. यूपी में 8,65,460 राज्य सरकार के कर्मचारी हैं.
सिर्फ 8,17,644 कर्मचारियों ने ही अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी विभागों के अध्यक्षों और अधिकारियों को 24 नवंबर 2025 और छह जनवरी 2026 को स्पष्ट रूप से निर्देश दे दिए थे. मुख्य सचिव के कड़े निर्देशों के बाद भी लास्ट डेट तक सिर्फ 8,17,644 कर्मचारियों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया था. 31 जनवरी की आधी रात को पोर्टल बंद हुआ और तब तक 47,816 कर्मचारी ऐसे रह गए थे, जिन्होंने अपनी संपत्ति के बारे में जानकारी नहीं दी.
डिफॉल्टरों के खिलाफ होगी कार्रवाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्य सचिव ने संपत्ति का ब्योरा अपलोड न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने सभी विभागों के प्रमुखों को आदेश दिया है कि डिफॉल्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. उन्होंने सभी अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने विभाग के डिफॉल्टरों के बारे में पता लगाएं कि उन्हें कहीं सैलरी तो नहीं मिल गई. अगर किसी डिफॉल्टर को सैलरी मिल गई है तो उस विभाग के डीडीओ को जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
बता दें, सरकार ने डीडीओ को पहले ही साफ कर दिया था कि 31 जनवरी तक संपत्ति का ब्योरा जमा होने के बाद ही जनवरी के वेतन का फरवरी में भुगतान किया जाए. जबकि डिफॉल्टरों की सैलरी को रोका जाए.
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