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SC ने यूपी में डीजे बजने पर लगी रोक को हटाई, हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में डीजे बजने पर लगी रोक को हटा दिया है. एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्री कोर्ट ने फैसला सुनाया है. बता दें कि साल 2019 में इलाहाबाद ने पूरे राज्य में डीजे पर प्रतिबंध लगा दिया था.

News Nation Bureau | Edited By : Shailendra Kumar | Updated on: 15 Jul 2021, 02:50:27 PM
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (Photo Credit: @newsnation)

highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में डीजे बजने पर लगी रोक को हटाई
  • 2019 में इलाहाबाद  ने पूरे राज्य में डीजे पर प्रतिबंध लगा दिया था
  • सुप्रीम कोर्ट ने आज हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया

 

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में डीजे बजने पर लगी रोक को हटा दिया है. एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्री कोर्ट ने फैसला सुनाया है. बता दें कि साल 2019 में इलाहाबाद ने पूरे राज्य में डीजे पर प्रतिबंध लगा दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने आज हाई कोर्ट के उसी आदेश को रद्द कर दिया है. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा - इलाहाबाद हाईकोर्ट  ने डीजे ऑपरेटर के पक्ष  को सुने रोक का एकतरफा आदेश दे दिया था. हालांकि कोर्ट ने यूपी के डीजे संचालकों को राहत देते हुए यह भी कहा है कि ध्वनि प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पहले दिए गए निर्देशों का पालन होना चाहिए, साथ ही कहा कि लाइसेंस लेकर ही डीजे बजाया जाए.

इलहाबाद हाईकोर्ट ने डीजे पर लगाया था रोक
अगस्त 2019 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के हाशिमपुर इलाके के सुशील चंद्र श्रीवास्तव की याचिका पर ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त आदेश दिया था. याचिकाकर्ता ने कांवड़ यात्रा के दौरान अपने घर के पास लगाए गए एक एलसीडी का मसला कोर्ट में रखा था. यह बताया था कि सुबह 4 बजे से 12 बजे रात तक वह बजता रहता है. इससे उनकी 85 साल की मां परेशान हो जाती हैं.

हाईकोर्ट ने अपनी तरफ से याचिका को विस्तृत करते हुए पूरे राज्य के लिए आदेश दे दिया. डीजे को कानों के लिए अप्रिय और लोगों को परेशान करने वाला बताकर सभी जिलाधिकारियों को यह निर्देश दे दिया कि वह इसके लिए लाइसेंस जारी न करें. बिना लाइसेंस इसे बजाने वालों पर कानूनी कार्रवाई करें.

राज्य सरकार की तरफ से बनाए गए नियमों के अनुसार, डीजे बजाया जाए
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के करीब 1 दर्जन डीजे संचालकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह माना कि हाईकोर्ट का आदेश आजीविका कमाने के मौलिक अधिकार का हनन करता है. जस्टिस विनीत सरन और दिनेश माहेश्वरी की बेंच ने डीजे संचालकों को राहत देते हुए यह भी कहा है कि ध्वनि प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पहले दिए गए निर्देशों का पालन हो. राज्य सरकार की तरफ से बनाए गए नियमों के अनुसार, लाइसेंस लेकर ही डीजे बजाया जाए.

 

First Published : 15 Jul 2021, 02:26:31 PM

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