Noida Puzzle Parking: नोएडा में बनेगी तीन और पजल पार्किंग, जानें नॉर्मल से कितना अलग है ये सिस्टम

Noida Puzzle Parking: नोएडा प्राधिकरण में तीन और पजल पार्किंग बनाई जाएगी. आखिर ये पजल पार्किंग क्या होती है और ये नॉर्मल पार्किंग से कितना अलग है, आइये जानते हैं…

Noida Puzzle Parking: नोएडा प्राधिकरण में तीन और पजल पार्किंग बनाई जाएगी. आखिर ये पजल पार्किंग क्या होती है और ये नॉर्मल पार्किंग से कितना अलग है, आइये जानते हैं…

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Jalaj Kumar Mishra
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Noida 3 more Puzzle Parking know how it is Different From Normal

Noida Puzzle Parking

Noida Puzzle Parking: नोएडा शहर में पार्किंग एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. सड़क पर गाड़ी खड़ी की जाए तो जाम लग जाता है. इसी समस्या को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण ने बड़ा फैसला लिया है. नोएडा शहर के तीन और सेक्टरों में अब पजल पार्किंग बनेगी. पहले से प्रस्तावित सेक्टर-93 की पजल पार्किंग के लिए टेंडर जारी किया गया है, जिसके लिए दो एजेंसियां आगे आईं हैं. अब इनके कागजों की जांच की जाएगी, जिसके बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. बता दें, प्राधिकरण ने पिछले साल ही पजल पार्किंग बनाने का फैसला किया था.

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  1. पहली पजल पार्किंग- सेक्टर-63 
  2. दूसरी पजल पार्किंग- सेक्टर-124
  3. तीसरी पजल पार्किंग- सेक्टर-15, अलका सिनेमा के पास
  4. चौथी पजल पार्किंग- सेक्टर-62 

नॉर्मल पार्किंग से कितनी अलग है पजल पार्किंग

ऑटोमेटिड पजल पार्किंग एक पजल गेम की तरह होती है. इसमें जितने पार्किंग स्लॉट होते हैं, उतने ही स्टैंड होते हैं, जो ऊपर, नीचे, दाएं और बाएं होते रहते हैं. इस पार्किंग में एक कार को पार्क करने में तीन से छह मिनट का वक्त लगता है. वहीं, मल्टीस्टोरी पार्किंग में एक कार पार्क करने में 10 से 15 मिनट का वक्त लगता है. नोएडा में 4 से 6 फ्लोर तक की ऑटोमेटिड पजल पार्किंग बनेंगी. हर फ्लोर पर 25 कारों को आसानी से पार्क किया जा सकेगा. इस तरह की पार्किंग के लिए अधिक जगह की आवश्यकता नहीं होती. बहुत कम जगह में पांच से छह फ्लोर तक की पार्किंग बन जाती है. पूरी पार्किंग सेंसर बेस्ड है, जिस वजह से चोरी से लेकर टूट फूट का खतरा एकदम कम हो जाता है. पजल पार्किंग के संचालन में  ज्यादा लोगों की जरूरत नहीं पड़ती.

सेंसर की वजह से हादसे का खतरा कम

दरअसल, पार्किंग ऑडोमैटेड होती है, जिस वजह से गाड़ियां एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर में शिफ्ट होती हैं. इसी प्रकार से गाड़ियां नीचे आती हैं. पूरा काम मशीनों के जरिए होता है. इस वजह से सेंसर लगाए गए हैं. अगर कोई बच्चा या फिर कोई जानवर गलती से पार्किंग में चला जाता है तो कार जहां है, वहीं ऑटोमैटिकली स्थिर हो जाती है. वह नीचे नहीं आएगी, जिससे इसके नीचे कोई दब न जाए. इसकी एक सीमा तय की जा सकती है, जिसे पीली लाइन में इंडीकेट किया जाता है.  

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