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निर्दोष दंपति ने जेल में काटी 5 साल की सजा, अपने लापता बच्चों को ऐसे ढूंढा

दोनों बच्चों को उसके दादा की खराब आर्थिक स्थिति के कारण अक्टूबर 2019 में आगरा के एक बाल संरक्षण गृह में शिफ्ट कर दिया गया था. दंपति की गिरफ्तारी के तुरंत बाद दोनों को उनके दादा-दादी को सौंप दिया गया. 

News Nation Bureau | Edited By : Ravindra Singh | Updated on: 24 Jan 2021, 04:11:46 PM
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सांकेतिक चित्र (Photo Credit: आईएएनएस)

नई दिल्ली :

उत्तरप्रदेश में एक दंपति के लापता नाबालिग बच्चे को आखिरकार फिरोजाबाद और कानपुर में अलग-अलग चिल्ड्रेन होम से ढूंढ निकाला गया. दंपति को उस अपराध के लिए पांच साल की जेल हुई थी, जो उन्होंने किया ही नहीं था. दंपति, नरेंद्र सिंह (40) और उनकी पत्नी नजमा (30), अपने बेटे अजीत और बेटी अंजू का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे, जो सितंबर 2015 में उनकी गिरफ्तारी के समय पांच और तीन साल के थे.

सूत्रों के अनुसार, दोनों बच्चों को उसके दादा की खराब आर्थिक स्थिति के कारण अक्टूबर 2019 में आगरा के एक बाल संरक्षण गृह में शिफ्ट कर दिया गया था. दंपति की गिरफ्तारी के तुरंत बाद दोनों को उनके दादा-दादी को सौंप दिया गया. आगरा चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने कहा, दोनों बच्चे अलग-अलग चिल्ड्रेन होम में रह रहे थे. उम्र के सत्यापन के बाद दोनों को अलग-अलग सुविधाओं में भेज दिया गया था. उम्र सत्यापन में पता चला कि दोनों की उम्र 10 वर्ष से उपर थी.

अजीत को फिरोजाबाद में लड़कों के लिए बनाए गए चिल्ड्रेन होम में पाया गया, जबकि अंजू को कानपुर में लड़कियों के लिए बने चिल्ड्रेन होम में पाया गया. इस बीच, दंपति के वकील वंशो बाबू ने शर्मा के दावों को खारिज कर दिया और कहा कि बच्चों को उनकी वैध उम्र के बावजूद गलत तरीके से बाल संरक्षण गृह से हटा दिया गया है. उन्होंने कहा कि युगल की प्राथमिकता अब जल्द से जल्द बच्चों के साथ फिर से जुड़ना है और वे औपचारिकताएं पूरी करने के लिए सोमवार को सीडब्ल्यूसी अधिकारियों से मिलेंगे.

इस बीच, आगरा के जिला मजिस्ट्रेट प्रभु एन सिंह ने कहा कि जिला प्रोबेशनरी अधिकारी उनके संपर्क में हैं और बच्चों को आगरा वापस लाने के लिए सभी सहायता प्रदान करेंगे. पांच साल के लड़के की हत्या के बाद पुलिस ने 2015 में आगरा के बाह से नरेंद्र सिंह और उसकी पत्नी नजमा को गिरफ्तार किया था. दंपति को रिहा करने के अपने आदेश में, अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायालय ने पुलिस को फटकार लगाई. अदालत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि निर्दोष दंपति ने सलाखों के पीछे पांच साल बिताए हैं और मुख्य आरोपी अभी भी आजाद है.

अदालत ने साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लापरवाही के लिए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए. अदालत ने तब सिफारिश करते हुए कहा किअसली अपराधी को पकड़ने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में जांच फिर से शुरू की जाय. बच्चों के पिता और पूर्व शिक्षक नरेंद्र सिंह ने कहा, "हमारे बच्चों की क्या गलती थी? उन्हें अनाथों की तरह रहना पड़ा. मेरा बेटा अजीत और बेटी अंजू बहुत छोटे थे, जब पुलिस ने हमें कथित हत्या के लिए गिरफ्तार किया था."

First Published : 24 Jan 2021, 04:11:46 PM

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