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आय से अधिक संपत्ति मामला : मुलायम सिंह यादव और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को CBI की क्लीनचिट

हलफनामे में सीबीआई ने कहा है कि 7 अगस्त 2013 को जांच बंद की जा चुकी है.

By : Rajeev Mishra | Updated on: 21 May 2019, 01:02:29 PM
मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव

मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव

नई दिल्ली:

मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट से दोनों को राहत मिली है. सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में क्लीनचिट दी है. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. हलफनामे में कहा है कि 7 अगस्त 2013 को जांच बंद की जा चुकी है. क्योंकि शुरुआती जांच में किसी संज्ञेय अपराध की पुष्टि नहीं हुई थी. याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने कोर्ट से मांग की थी कि वो सीबीआई को इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दे. इस मामले में 2007 में जांच का आदेश आया था. 2008 में सीबीआई ने केस दर्ज होने लायक सबूत मिलने की बात कही थी.

बता दें कि सीबीआई ने समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव उनके पुत्र अखिलेश यादव व प्रतीक यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले मे सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी थी कि प्रारंभिक जांच 2013 मे पूरी कर ली गई थी. सीबीआइ से चार हफ़्ते में कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया था. तब मुलायम सिंह यादव ने मामले को राजनीति से प्रेरित बताया था.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनके खिलाफ दाखिल की गई अर्जी राजनीति से प्रेरित है. याचिकाकर्ता ने गलत मंशा से चुनाव के ठीक पहले उनके खिलाफ अर्जी दाखिल की है. सीबीआई कोर्ट के आदेश पर आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में उनके और परिवार के सदस्यों खिलाफ जांच कर चुकी है और उस जांच में सीबीआई को कुछ भी नहीं मिला.

इसी साल 25 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता और वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सीबीआई से मुलायम सिंह यादव व उनके पुत्र अखिलेश तथा प्रतीक यादव के खिलाफ हुई जांच की रिपोर्ट पेश करने की मांग पर जवाब मांगा था.

मुलायम सिंह ने अर्जी का विरोध करते हुए हलफनामे में कहा है कि वह और उनका परिवार सार्वजनिक जीवन में और राजनीति में है. वह स्वयं और परिवार के अन्य सदस्य केन्द्र व राज्य में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. अर्जीकर्ता स्वयं भी राजनैतिक व्यक्ति है और चुनाव लड़ चुका है. उसने 2019 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले यह अर्जी गलत मंशा से उनकी छवि खराब के लिए दाखिल की है. मुलायम सिंह ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का मुख्य आदेश उनके और उनके परिवार पर लगाए गए आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों की प्रारंभिक जांच का था. और उस आदेश पर सीबीआई ने पीई दर्ज करके प्रारंभिक जांच की जिसमें सीबीआई को उनके खिलाफ कुछ नहीं मिला.

मुलायम ने कहा था कि पीई दर्ज करने के बाद सीबीआई ने पहली स्टेटस रिपोर्ट 30 जुलाई 2007 को दी थी जिसमें कहा गया था कि मुलायम सिंह के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता. इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए अतिरिक्त आरोपों पर सीबीआइ ने 28 अगस्त 2007 को दूसरी स्थिति रिपोर्ट दी जिसमें फिर कहा कि प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता. फिर 26 अक्टूबर 2007 को सीबीआई ने तीसरी रिपोर्ट दाखिल की उस रिपोर्ट में सीबीआई ने बिना किसी कानूनी आधार के जांची गई अवधि का प्रोजेक्ट एक्सपेन्डिचर 21541523 से बढ़ा कर 44562436 कर दिया.

उस रिपोर्ट में सीबीआइ ने कहा कि उनके खिलाफ 26306498 की आय से अधिक संपत्ति है. सिंह का कहना था कि चतुर्वेदी ने अपनी अर्जी मे सिर्फ सीबीआई की 26 अक्टूबर 2007 की स्थिति रिपोर्ट को आधार बनाया है और वही रिपोर्ट कोर्ट में पेश की है. उन्होंने पहले की दो रिपोर्ट नहीं दी हैं. कोर्ट से तथ्य छिपाए हैं. मुलायम सिंह का कहना था कि तीन रिपोर्ट में अंतर होने के कारण सीबीआई अधिकारी ने एक एनालेसिस रिपोर्ट दी थी जिसमें फिर कहा गया कि आय से अधिक संपत्ति का मामला नहीं बनता.

मुलायम का कहना था कि कानून के मुताबिक जब प्रारंभिक जांच में मामला बनता है तभी नियमित केस दर्ज होता है. जब प्रारंभिक मामला नहीं बनता तो फिर जांच रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने का सवाल कहां उठता है. कोर्ट ने कभी भी नियमित केस दर्ज करने का आदेश नहीं दिया था. वैसे भी कोर्ट ने उनकी रिव्यू खारिज करते हुए सीबीआई को स्वतंत्र होकर कानून के मुताबिक निर्णय लेने को कहा था.

First Published : 21 May 2019, 01:02:29 PM

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