सीएम योगी ने जापान में की 'मैग्लेव' की सवारी, हवा से करती है बातें, जानें खासियत

उत्तर प्रदेश में निवेश और आधुनिक बुनियादी ढांचे की संभावनाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से जापान पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टोक्यो में हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रेन की रोमांचक यात्रा की.

उत्तर प्रदेश में निवेश और आधुनिक बुनियादी ढांचे की संभावनाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से जापान पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टोक्यो में हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रेन की रोमांचक यात्रा की.

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Dheeraj Sharma
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CM Yogi in Japan

उत्तर प्रदेश में निवेश और आधुनिक बुनियादी ढांचे की संभावनाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से जापान पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टोक्यो में हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रेन की रोमांचक यात्रा की. यह सफर केवल तकनीकी जिज्ञासा तक सीमित नहीं था, बल्कि भविष्य के उत्तर प्रदेश की परिवहन नीति की दिशा तय करने वाला कदम भी माना जा रहा है.

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टोक्यो में 100 किलोमीटर की परीक्षण यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने 600 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार का अनुभव किया. यह गति पारंपरिक बुलेट ट्रेन से भी कहीं अधिक है और आने वाले समय के परिवहन मॉडल की झलक देती है.

क्या है मैग्लेव तकनीक?

मैग्लेव यानी ‘मैग्नेटिक लेविटेशन’ तकनीक पर आधारित यह ट्रेन पारंपरिक लोहे की पटरियों पर नहीं चलती. यह चुंबकीय शक्ति के सहारे ट्रैक के ऊपर हवा में तैरती हुई आगे बढ़ती है। घर्षण लगभग समाप्त होने से इसकी रफ्तार 600 से 700 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है.

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्रा का समय बेहद कम हो जाता है और संचालन के दौरान कंपन व शोर भी अपेक्षाकृत कम रहता है. जापान लंबे समय से हाई-स्पीड रेल तकनीक में अग्रणी रहा है, और मैग्लेव इसका अत्याधुनिक उदाहरण है.

टोक्यो-नागोया कॉरिडोर का निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने टोक्यो-नागोया मैग्लेव कॉरिडोर का भी निरीक्षण किया, जिसे 2027 तक चालू करने की योजना है. यह परियोजना जापान की महत्वाकांक्षी परिवहन योजनाओं में शामिल है और देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने का काम करेगी.

इस निरीक्षण का उद्देश्य केवल तकनीक देखना नहीं, बल्कि यह समझना भी था कि इतनी उच्च गति वाली रेल प्रणाली को सुरक्षित, टिकाऊ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य कैसे बनाया जाता है.

यूपी के लिए क्या मायने?

उत्तर प्रदेश पहले से ही एक्सप्रेसवे, मेट्रो और रक्षा कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है. ऐसे में मैग्लेव जैसी तकनीक का अध्ययन राज्य के लिए भविष्य की संभावनाओं के द्वार खोल सकता है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ऐसी तकनीक को भारत में अपनाया जाता है, तो यह औद्योगिक शहरों और आर्थिक हब के बीच कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई दे सकती है. हालांकि, इसकी लागत और व्यवहारिकता पर गहन अध्ययन जरूरी होगा.

निवेश और तकनीकी साझेदारी की दिशा में कदम

सीएम योगी की यह यात्रा निवेश आकर्षित करने और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. जापान और उत्तर प्रदेश के बीच औद्योगिक सहयोग पहले से मौजूद है और अब परिवहन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं तलाश की जा रही हैं. कुल मिलाकर, यह दौरा केवल एक हाई-स्पीड यात्रा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विजन की झलक है.

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