आयुष्मान योजना के तहत क्लेम का 30 दिनों के अंदर होगा भुगतान, सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे

जनवरी 2025 में जहां क्लेम की पेंडेंसी 10 लाख 75 हजार तक पहुंची गई. वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर मात्र 3 लाख रह गई है.

जनवरी 2025 में जहां क्लेम की पेंडेंसी 10 लाख 75 हजार तक पहुंची गई. वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर मात्र 3 लाख रह गई है.

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Mohit Saxena
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योगी आदित्यनाथ, (X@myogiadityanath)

योगी सरकार गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इलाज कराने वाले परिवारों के लिए कैशलेस उपचार सुनिश्चित किया गया है, वहीं योजना से जुड़े अस्पतालों को समय पर भुगतान तय करने की व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है.

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क्लेम जल्द ही निस्तारित कर दिया जाएगा

इसी का नतीजा है कि बीते एक वर्ष में आयुष्मान योजना के क्लेम निस्तारण में काफी सुधार देखा गया है. स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान  भारत योजना के तहत प्रदेश के सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों की ओर से प्रस्तुत क्लेम के पारदर्शी निस्तारण को लेकर लगातार सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं. जनवरी 2025 में जहां क्लेम की पेंडेंसी 10 लाख 75 हजार तक पहुंची गई. वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर मात्र 3 लाख रह गई है. इसे भी जल्द ही  निस्तारित कर दिया जाएगा.

क्लेम का समयबद्ध निस्तारण एक बड़ी चुनौती

उन्होंने बताया कि प्रदेश में योजनाओं के तहत प्रति माह औसतन 2 लाख से अधिक क्लेम अस्पतालों से प्राप्त होते हैं. इतनी बड़ी संख्या में आने वाले क्लेम का समयबद्ध निस्तारण का एक बड़ी चुनौती बताया जा रहा है. इसके बाद भी यह तय किया जा रहा है कि पुराने मामलों के साथ नए क्लेम का नियमित और सुव्यवस्थित तरीके निस्तारण होगा. इसका मुख्य लक्ष्य है कि सूचीबद्ध अस्पताल बिना किसी कारण के आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज तय करें.

क्लेम की जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी

मेडिकल ऑडिट व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इस क्रम में मेडिकल ऑडिटरों की संख्या 40 से बढ़ाकर 130 की गई है. इससे क्लेम की जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी. इसके लिए क्लेम डेस्क में भी इजाफा किया गया है. इसे 100 से बढ़ाकर 125 किया गया है. योजना के तहत अस्पतालों की ओर से पेश क्लेम्स का भुगतान 30 दिनों की तय समय सीमा यानी टर्न अराउंड टाइम (टीएटी) के भीतर किया जाए. इसके उद्देश्य के लिए एजेंसी स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें हो रही हैं. लंबित मामलों की निगरानी की जा रही है.

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