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गैंगस्टर रवि काना की रिहाई मामले में बड़ी कार्रवाई Photograph: (File)
नोएडा के गैंगस्टर और स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. इस मामले में बांदा कारागार के जेलर विक्रम सिंह यादव निलंबित को निलंबित कर दिया गया है. जेलर पर आरोप है कि उन्होंने नोएडा के कुख्यात क्रिमिनल रवि काना को बिना कोर्ट का ऑर्डर मिले ही जेल से रिहा कर दिया, जबकि नोएडा कोर्ट ने उसे B वारंट पर तलब कर रखा था. बांदा जेल प्रशासन का कहना है कि रवि काना की रिहाई शाम 6.39 बजे हो गई थी, जबकि नोएडा कोर्ट का वारंट रात पौने 8 बजे प्राप्त हुआ था. बता दें कि रवि काना नोएडा का बड़ा स्क्रैप माफिया है. वह नोएडा की ज्यादातर फैक्ट्रियों से करोड़ों का स्क्रैप अपनी ताकत के दम पर कौड़ियों के भाव में खरीद लेता है.
जानें क्या है पूरा मामला?
बता दें कि यूपी की बांदा जेल में बंद नोएडा के स्कैप माफिया रवि काना उर्फ रवि नागर को गुरुवार को रिहा कर दिया गया. उसके बाद वह गायब हो गया. इस मामले पर शुक्रवार को कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई. नोएडा में दर्ज वसूली के मामले में उसे बी-वारंट पर तलब किया गया था. इस मामले में उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं मुख्यालय ने बांदा जेल में तैनात जेलर विक्रम सिंह यादव को सस्पेंड कर दिया. यह कार्रवाई शुक्रवार को जारी आदेश के तहत की गई है.
गंभीर आपराधिक मामले में वॉन्टेड था रवि काना
आदेश में कहा गया कि, विचाराधीन बंदी रविंद्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना थाना सेक्टर-63 नोएडा के एक गंभीर आपराधिक मामले में वॉन्टेड था, उसे बांदा जिला कारागार से रिहा कर दिया गया. इस मामले में जेलर विक्रम सिंह यादव की भूमिका संदिग्ध पाई गई है. आदेश में कहा गया है कि शुरुआती जांच में यह माना गया कि जेलर विक्रम सिंह यादव ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती, जो यूपी सरकारी सेवक आचरण नियमावली के विपरीत है. इसी के आधार पर शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. निलंबन के दौरान विक्रम सिंह यादव को जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, लेकिन इस दौरान वे किसी अन्य सेवा, व्यवसाय या निजी कार्य में शामिल नहीं हो सकेंगे.
क्या बोले बांदा के जेल अधीक्षक?
बता दें कि नोएडा के स्क्रैप माफिया रवि काना के खिलाफ उगाही के मामले में तीन धाराओं में इसी इसी महीने सेक्टर-63 थाने में मामला दर्ज किया गया. इसके अलावा उस पर पहले से ही अन्य मुकदमे चल रहे हैं. जिसके चलते वह बांदा जिला कारागार में बंद था. नोएडा पुलिस ने अदालत में पेश कराने के लिए बी-वारंट जारी कराया. बांदा जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने कहा कि बी-वारंट के तहत 29 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रवि काना को कोर्ट के समक्ष पेश कराना था, लेकिन कस्टडी को लेकर कोई आदेश नहीं आया. ऐसे में उसे रिहा कर दिया गया. उसकी रिहाई के बाद आदेश मिला.
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