अविमुक्तेश्वरानंद की अभी नहीं होगी गिरफ्तारी, हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं. प्रयागराज में दर्ज यौन शोषण के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हो गई थी और गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई थी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं. प्रयागराज में दर्ज यौन शोषण के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हो गई थी और गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई थी

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Dheeraj Sharma
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सभी को मराठी सिखनी चाहिए, हम खुद इसके लिए प्रयासरत : अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं. प्रयागराज में दर्ज यौन शोषण के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हो गई थी और गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई थी. हालांकि, ताज़ा घटनाक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिलहाल उन्हें बड़ी राहत दी है. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और तब तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.

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क्या हैं आरोप?

कुछ बटुकों की ओर से आश्रम में यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. मेडिकल परीक्षण में उत्पीड़न की पुष्टि होने की बात सामने आई है, जिससे मामला और गंभीर हो गया. इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

कोर्ट में क्या हुआ?

मामले की सुनवाई जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष अधिवक्ताओं से खचाखच भरा रहा. कोर्ट ने पूछा कि पहले सेशन कोर्ट में अर्जी क्यों नहीं दी गई और सीधे हाईकोर्ट क्यों आए? साथ ही अदालत ने पुलिस से यह भी सवाल किया कि कथित पीड़ित बच्चे कहां हैं और उनके बयान की स्थिति क्या है.

राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि शंकराचार्य प्रभावशाली व्यक्ति हैं, ऐसे में उन्हें राहत मिली तो जांच प्रभावित हो सकती है. वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि मामला झूठा और साजिशन बनाया गया है. एक बटुक की मार्कशीट पेश कर उसे बालिग बताया गया और शिकायतकर्ता की कथित आपराधिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया गया.

गिरफ्तारी पर रोक, जांच में सहयोग का निर्देश

हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखते हुए स्पष्ट किया कि जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक गिरफ्तारी नहीं की जाएगी. साथ ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य को पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है. इसका मतलब है कि पुलिस पूछताछ और विवेचना जारी रख सकती है, लेकिन फिलहाल गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं होगी.

अब आगे क्या?

अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं. यदि अदालत अग्रिम जमानत मंजूर करती है तो स्वामी को बड़ी कानूनी राहत मिल सकती है. वहीं, अगर अर्जी खारिज होती है तो गिरफ्तारी की संभावना फिर से बढ़ सकती है. फिलहाल मामला कानूनी प्रक्रिया के दौर से गुजर रहा है और जांच एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेंगी.

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