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स्कूल-कॉलेज मना सकेंगे धार्मिक फेस्टीवल, कर्नाटक सरकार ने वापस लिया आदेश

कर्नाटका के समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा हाल ही में एक बड़ा आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत विभाग के अंदर आने वाले सभी रेजिडेंशियल स्कूल और कॉलेजों में धार्मिक त्यौहार मानने पर पाबंदी लगाई गई थी.

Updated on: 15 Feb 2024, 06:58 PM

नई दिल्ली :

कर्नाटका के समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा हाल ही में एक बड़ा आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत विभाग के अंदर आने वाले सभी रेजिडेंशियल स्कूल और कॉलेजों में धार्मिक त्यौहार मानने पर पाबंदी लगाई गई थी. हालांकि अब कर्नाटका सरकार ने यह आदेश वापस ले लिया है. दरअसल कई संगठनों द्वारा सरकार के आदेश की आलोचना की गई थी, लिहाजा स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा फौरन करवाई करते हुए आदेश वापस ले लिया गया है. क्या था ये आदेश, चलिए विस्तार से जानते हैं...

बता दें कि, समाज कल्याण मंत्रालय की ओर से दिए गए इस आदेश में स्पष्ट किया गया था कि, विभाग के अंदर आने वाले सभी रेजिडेंशियल स्कूल और कॉलेजों में उगादी, रामजान, क्रिसमस, ईद मिलाद और संक्रांति के त्योहार को मानने की इजाजत नहीं है. साथ ही स्पष्ट किया गया था कि, आदेश का उल्लंघन करने पर सख्त करवाई की जाएगी. 

वहीं इस आदेश में कहा गया था कि, सिर्फ 10 राष्ट्रीय और राज्य त्योहारों को मनाया जा सकता है. इसके अलावा अगर कोई भी अन्य त्योहार मनाए जाते हैं, तो निश्चित रूप से कानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

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गौरतलब है कि कर्नाटका में कुल 167 रेजिडेंशियल स्कूल और कॉलेज है जो समाज कल्याण मंत्रालय में आते है. इन सभी स्कूल और कॅालेजों में सरकार का आदेश लागू किया गया है. सरकार का मानना है इससे बिना वजह के बच्चों की पढ़ाई बाध्य होती है. ताकि बच्चों को ज्यादा दिन पढ़ाई करने का मौका मिले इसलिए ये फैसला लिया गया है. हालांकि फैसला आते ही राजनीति तेज हो गयी है. विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी है. साथ ही कुछ संगठन भी फैसले के पक्ष में नहीं है. 

इससे पहले भी विवादित रहा है कर्नाटक

आपको बता दें कि इससे पहले भी कर्रनाटक के स्कूलों में हिजाब को लेकर काफी कंट्रोवर्सी देखने को मिली थी. काफी दिनों तक राज्य की राजनीति में हिजाब मामला छाया रहा था. अब सरकार ने रेजिडेंशियल स्कूलों में त्योहार न मनाने के फैसले से फिर राजनीति गरमा दी है. अब देखना ये है कि फैसला कितने दिन टिकेगा. क्योंकि फैसले के खिलाफ बयानबाजी तेज हो गई है.