राजस्थान की भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला, चुनाव लड़ने पर लगी ये रोक हटाई

राजस्थान में स्थानीय राजनीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है. राज्य कैबिनेट ने नगर निकाय और पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के लिए लागू ‘दो से अधिक बच्चे’ की शर्त को हटाने का निर्णय लिया है.

राजस्थान में स्थानीय राजनीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है. राज्य कैबिनेट ने नगर निकाय और पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के लिए लागू ‘दो से अधिक बच्चे’ की शर्त को हटाने का निर्णय लिया है.

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Dheeraj Sharma
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Bhajanlal Sharma

राजस्थान में स्थानीय राजनीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है. राज्य कैबिनेट ने नगर निकाय और पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के लिए लागू ‘दो से अधिक बच्चे’ की शर्त को हटाने का निर्णय लिया है. अब ऐसे लोग भी चुनाव लड़ सकेंगे जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं. सरकार इस संशोधन को मौजूदा विधानसभा सत्र में विधेयक के रूप में पेश कर कानून का रूप देने की तैयारी में है.

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कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने 25 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी आधिकारिक जानकारी दी. उनके अनुसार, यह फैसला सामाजिक बदलाव और वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

क्या थी पुरानी व्यवस्था?

राजस्थान में पिछले कई वर्षों से नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों में उम्मीदवार बनने के लिए दो से अधिक संतान न होने की शर्त लागू थी. इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहन देना बताया जाता था. इस प्रावधान के कारण कई संभावित उम्मीदवार चुनाव लड़ने से वंचित रह जाते थे.

अब कैबिनेट के फैसले के बाद यह बाध्यता समाप्त हो जाएगी, जिससे राजनीतिक भागीदारी का दायरा बढ़ने की संभावना है.

सरकार का पक्ष: जागरूकता बढ़ी, विकल्प खुला होना चाहिए

कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि समाज में जागरूकता पहले से अधिक है. उनके मुताबिक, आर्थिक रूप से सक्षम परिवार यदि अधिक बच्चों का पालन-पोषण कर सकते हैं, तो उन्हें चुनाव लड़ने से रोकना उचित नहीं है.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी विशेष विचारधारा या संगठन से प्रभावित होकर नहीं लिया गया है. उनका कहना था कि यदि ऐसा होता तो नियम को और सख्त किया जाता, न कि समाप्त.

कांग्रेस का आरोप: विचारधारा आधारित निर्णय

दूसरी ओर विपक्षी पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है. कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार वैचारिक एजेंडे के तहत काम कर रही है और जनसंख्या नियंत्रण जैसे गंभीर विषय पर राजनीतिक लाभ के लिए रुख बदला गया है. विपक्ष का कहना है कि यह कदम सामाजिक संतुलन और नीति की निरंतरता के खिलाफ है.

बहरहाल अब निगाहें विधानसभा सत्र पर हैं, जहां इस प्रस्तावित संशोधन को विधेयक के रूप में पेश कर अंतिम मंजूरी दी जाएगी.

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