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पंजाब: CM ने जमीन जायदाद बंटवारे को दर्ज कराने के लिए वेबसाइट की लॉन्च

News Nation Bureau | Edited By : Mohit Saxena | Updated on: 12 Oct 2022, 07:52:29 PM
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bhagwant mann (Photo Credit: social media)

highlights

  • जमीन की बांट को दिखाता फील्ड मैप भी सौंपना होगा
  • ऑनलाइन अर्जियां कानूनगों इंचार्ज और फिर सम्बन्धित पटवारी को भेजी जाएंगी

 चंडीगढ़:  

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मानव  (Bhagwant Mann)  ने राजस्व विभाग के कामकाज को डिजिटल करके राज्य के नागरिकों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए आज पारिवारिक विभाजन (ज़मीन जायदाद की बांट) को दर्ज करने की प्रक्रिया को और अधिक सुचारू बनाने के लिए वेबसाईट लॉन्च की. वेबसाइट https://eservices.punjab.gov.in को लॉन्च करते हुए मुख्यमंत्री ने इसको राज्य के निवासियों की सुविधा के लिए एक क्रांतिकारी फैसला बताया, जिससे पारिवारिक विभाजन को दर्ज करने की प्रक्रिया को और अधिक सुचारू बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस वेबसाइट के द्वारा पारिवारिक विभाजन के लिए लोगों की अर्जियां एक क्लिक के द्वारा आसानी से जमा हो सकेंगी. भगवंत मान ने बताया कि नागरिक इस वेबसाईट पर अपना नाम, पिता/पति का नाम, गांव का नाम, सब-तहसील/तहसील, जि़ला, खाता और खेवट नंबर के विवरणों समेत अर्जी देकर अप्लाई कर सकते हैं.  

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदनकर्ता को जमीन के सभी हिस्सेदारों द्वारा दस्तखत किया प्रस्तावित बांट का एक मैमोरंडम और ज़मीन की बांट को दिखाता फील्ड मैप भी सौंपना होगा. भगवंत मान ने बताया कि सम्बन्धित सर्कल राजस्व अधिकारी द्वारा कार्यवाही करने के उपरांत यह ऑनलाइन अर्जियां कानूनगों इंचार्ज और फिर सम्बन्धित पटवारी को भेजी जाएंगी. उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड के साथ मैमोरंडम के सभी तथ्यों को सत्यापित करने के बाद पटवारी सम्बन्धित पक्ष को कार्यवाही के लिए निजी तौर पर उपस्थित होने और इंतकाल दर्ज करने के लिए बुलाएगा.  

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंतकाल दर्ज करने के बाद सम्बन्धित पटवारी इसको सत्यापित करने के लिए कानूनगो के समक्ष पेश करेंगे और फिर अंतिम आदेशों के लिए सम्बन्धित सीआरओ (सहायक क्लेक्टर ग्रेड-2) के समक्ष पेश करेंगे. भगवंत मान ने कहा कि इंतकाल को सत्यापित करने के बाद हरेक अर्जी के लिए पोर्टल पर संक्षिप्त ऑर्डर दर्ज किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह नागरिक केंद्रित पहल हदबंदी की प्रक्रिया को सरल बनाने में अहम साबित होगी और इससे विवादों का निपटारा आपसी सहमति से किया जा सकेगा. भगवंत मान ने आगे कहा कि यह प्रक्रिया आसान ढंग से ज़मीन की खरीद-बिक्री के अलावा फसलों के नुकसान का मुआवज़ा प्राप्त करने और जमाबन्दी की नकल आसानी से प्राप्त करने के लिए सहायक सिद्ध होगी.

First Published : 12 Oct 2022, 07:49:18 PM

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