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Punjab Tender Scam: पंजाब में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच सरकार की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई है. विजिलेंस ब्यूरो अमृतसर के एसएसपी लखबीर सिंह को जहां गंभीर विभागीय अनियमितताओं के चलते निलंबित किया गया है, वहीं करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले में 7 अधिकारियों के सस्पेंड से प्रशासन में हड़कंप मच गया है. सूत्रों के अनुसार, नगर परिषद बटाला में सड़कों के निर्माण से जुड़े एक बड़े टेंडर में भारी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. 'एम.सी. बटाला के विभिन्न वार्डों की गलियों का निर्माण' (टेंडर आईडी: 2025 DLG 154511_1) नामक इस टेंडर को कथित तौर पर एक निजी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पक्ष में सुनियोजित तरीके से फिक्स किया गया.
ठेकेदारों को भी धमकाया गया
सूत्रों और ठेकेदारों के आरोपों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर सक्रिय कथित ब्लैकमेलर ने खुले तौर पर ठेकेदारों को धमकाया कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी इस टेंडर में हिस्सा न ले, अन्यथा उनकी साख खराब कर दी जाएगी और भविष्य का काम बंद करा दिया जाएगा. इन्हीं धमकियों के चलते टेंडर प्रक्रिया में जानबूझकर प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी गई.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी का मालिक लगातार टेंडर महज आधा प्रतिशत कम दरों पर जीतता रहा, जबकि उससे कम रेट भरने वाली अन्य कंपनियों को जानबूझकर तकनीकी खामियों के नाम पर बाहर कर दिया गया. सूत्रों का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया गया था कि फायदा सिर्फ एक ही कंपनी को मिले.
इतने करोड़ का है घोटाला
पंजाब सरकार की ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली के माध्यम से नगर निगम बटाला की ओर से आमंत्रित एक बड़ी सड़क निर्माण परियोजना में निजी कंपनी ने सबसे कम बोली (L1) लगाकर सफलता हासिल की है. यह टेंडर बटाला शहर के विभिन्न वार्डों में सड़कों के निर्माण से संबंधित है, जिसमें वार्ड नंबर 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 10, 11, 12, 13, 16, 19, 22, 23, 24, 25, 34, 43, 44 तथा मान फार्म रोड शामिल हैं.
ऐसे हुआ भ्रष्टाचार
परियोजना की अनुमानित लागत 24.22 करोड़ रुपए रखी गई थी, जिसके मुकाबले आरोपित कंपनी ने 1.26 प्रतिशत कम दर पर 23,91,68,676.72 (तेईस करोड़ इक्यानवे लाख अड़सठ हजार छह सौ छिहत्तर रुपये और बहत्तर पैसे) की बोली लगाई. यह टेंडर नगर निगम बटाला के आयुक्त की ओर से आमंत्रित किया गया था. तुलनात्मक विवरण के अनुसार निजी कंपनी की ओर से दी गई बोली को सबसे कम राशि वाली बोली घोषित किया गया है. सभी औपचारिक प्रक्रियाओं और स्वीकृतियों के बाद कार्यादेश जारी किया जाएगा.
लंबे वक्त से चल रही सुनियोजित प्लानिंग
बताया जा रहा है कि यह खेल अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से सुनियोजित तरीके से चल रहा था. टेंडर की शर्तें, तकनीकी मूल्यांकन और फाइलों की मूवमेंट तक पर एक खास गिरोह का नियंत्रण होने के आरोप सामने आए हैं, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा.
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