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देश की सबसे बड़ी नगर पालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है. चुनाव नतीजों के बाद जहां महायुति गठबंधन बहुमत के आंकड़े को पार कर चुका है, वहीं शिवसेना और भाजपा के बीच मेयर पद को लेकर सहमति बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में मंगलवार को शिवसेना और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच अहम बैठक होने जा रही है.
महायुति का दावा: मेयर हमारा ही होगा
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साफ शब्दों में कहा है कि महायुति गठबंधन जनादेश का सम्मान करेगा और मुंबई समेत जिन-जिन नगर निगमों में गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ा है, वहां मेयर भी महायुति का ही बनेगा. शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा के साथ किसी तरह का विवाद नहीं है और आपसी सहमति से फैसला लिया जाएगा. पार्टी सूत्रों के अनुसार, गतिरोध सुलझाने के लिए शिंदे दिल्ली जाकर शीर्ष नेतृत्व से भी चर्चा कर सकते हैं.
शिवसेना-भाजपा की पहली औपचारिक बैठक
बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना और भाजपा नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक बैठक होगी, जो मंगलवार 20 जनवरी 2026 को प्रस्तावित है. बैठक में शिवसेना के पूर्व सांसद राहुल शेवाले, भाजपा मुंबई अध्यक्ष आमित सताम, भाजपा पार्षद प्रभाकर शिंदे और शिवसेना नेता शीतल म्हात्रे के शामिल होने की संभावना है. इस बातचीत को मेयर पद के फॉर्मूले के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
आरक्षण लॉटरी और संभावित तारीख
इसी बीच राज्य सरकार ने मेयर पद के आरक्षण को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है. शहरी विकास विभाग 22 जनवरी को आरक्षण की लॉटरी कराएगा. सूत्रों के मुताबिक, बीएमसी मेयर का चुनाव 31 जनवरी को कराया जा सकता है. आरक्षण तय होने के बाद ही राजनीतिक दल अंतिम रणनीति पर आगे बढ़ेंगे.
उद्धव गुट का अपना दावा
वहीं दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) ने मेयर पद को लेकर आक्रामक तेवर दिखाए हैं. उनका अपना ही दावा है. पार्टी सांसद संजय राउत ने साफ कहा है कि किसी भी कीमत पर शिंदे गुट का नगरसेवक बीएमसी का मेयर नहीं बनेगा. उनका दावा है कि ठाकरे परिवार ही तय करेगा कि मुंबई का मेयर कौन होगा. यही नहीं उन्होंने यह भी कहा है कि मेयर बनाने के लिए बहुमत से सिर्फ 6 कदम हम दूर हैं.
वहीं, शिंदे गुट के 29 जीते हुए नगरसेवक फिलहाल बांद्रा के एक पांच सितारा होटल में ठहरे हुए हैं, जिसे लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं.
सीटों का गणित और विपक्ष की रणनीति
227 सीटों वाली बीएमसी में मेयर चुनने के लिए 114 वोटों की जरूरत होती है. चुनाव में भाजपा को 89 और शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं. इस तरह महायुति के पास कुल 118 सीटें हैं, जो बहुमत से चार अधिक हैं.
हालांकि, विपक्ष भी खेल पलटने की कोशिश में जुटा है. शिवसेना (यूबीटी) के पास 65 सीटें हैं. कांग्रेस-वंचित गठबंधन को 24, AIMIM को 8, MNS को 6, समाजवादी पार्टी को 2, अजित पवार की एनसीपी को 3 और शरद पवार गुट को 1 सीट मिली है. विपक्षी खेमे का दावा है कि वे 108 तक पहुंच चुके हैं और सिर्फ 6 पार्षदों के समर्थन से मेयर की कुर्सी उनके हाथ में आ सकती है.
अंतिम फैसला किसके हाथ?
भाजपा सूत्रों का मानना है कि बीएमसी मेयर को लेकर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगाएंगे. फिलहाल फडणवीस दावोस दौरे पर हैं, लेकिन उनकी वापसी के बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है. कुल मिलाकर, बीएमसी मेयर पद को लेकर सियासी घमासान अभी थमता नजर नहीं आ रहा है और आने वाले दिनों में मुंबई की राजनीति में बड़े उलटफेर संभव हैं.
हार के बाद रोशनी गायकवाड़ ने किया मुंबई हाई कोर्ट का रुख
वहीं बीएमसी चुनाव के वार्ड क्रमांक 3 से शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की उम्मीदवार रहीं रोशनी गायकवाड ने नतीजों को चुनौती देते हुए मुंबई हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. हार के बाद रोशनी गायकवाड़ ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव आयोग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से भाजपा उम्मीदवार को विजयी घोषित किया गया.
गायकवाड का आरोप है कि काउंटिंग के दिन उन्होंने देखा कि EVM मशीनों के सील टूटे हुए थे, वहीं बैलेट पेपर के सील भी खुले हुए पाए गए. इस पर उन्होंने तत्काल चुनाव अधिकारी के सामने आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन इसका कोई स्पष्ट कारण बताने के बजाय उन्हें धमकाने की कोशिश की गई.
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