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बीएमसी में करीब 30 साल का किला ढहने के बाद एक बार फिर उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है. अब कल्याण डोंडबली महानगर पालिका यानी केडीएमसी में राजनीतिक भूचाल मच गया है. शिवसेना यूटीबी ने अपने चार पार्षदों के लापता होने की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है. आरोप है कि यह पार्षद एकनाथ शिंद गुट की शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं.
जानें क्या है सीटों का गणित
विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक हलचल तेज हो गई है. केडीएमसी में कुल 122 सदस्य हैं और बहुमत का आंकड़ा 62 का है. मौजूदा स्थिति में शिंद गुट की शिवसेना के पास 53 नगर सेवक हो चुके हैं. राज ठाकरे की एमएनएस के सभी पांच पार्षद खुलकर समर्थन दे रहे हैं. वहीं शिंदे गुट की सहयोगी बीजेपी के पास 50 पार्षद हैं. अगर एमएनएस के पांच और शिवसेना यूटीबी के चार लापता पार्षद भी शिंदे खेमे में शामिल हो जाते हैं तो बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार हो जाएगा यही वजह है कि केडीएमसी इस वक्त महाराष्ट्र की सबसे हॉट सियासी जमीन बन चुकी है.
शिवसेना यूबीटी के पास केडीएमसी में कुल 11 पार्षद हैं. लेकिन इनमें से सिर्फ सात ने ही कोकण प्रादेशिक आयुक्त के पास रजिस्ट्रेशन कराया है. सूत्रों का कहना है कि दो पार्षद पहले से ही शिंदे गुट के संपर्क में हैं. जबकि जिन दो पार्षदों का लापता होना बताया जा रहा है, वह पहले स्थानीय समीकरणों के चलते एमएनएस से आ गए थे और अब वापस उसी खेमे में लौटने की तैयारी में यही अंदर खाने खेल काफी पहले से चल रहा था. अब सिर्फ उसका खुलासा हुआ है.
संजय राउत ने साधा निशाना
शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने इस पूरे मामले पर तीखा हमला बोला है. राउत ने कहा कि हमारे पार्षद गायब हैं. इसलिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है. उन्होंने कहा कि यह पार्षद हमारे चुनाव चिन्ह पर जीत कर आए थे. लेकिन जीत के 24 घंटे के भीतर ही उन्होंने अलग रास्ता चुन लिया. राउत ने इन्हें गद्दार तक कह डाला.
पुलिस ने कहा- केस दर्ज नहीं किया
वहीं मामले में कोलसेबाड़ी पुलिस का कहना है कि गुमशुदगी का मामला दर्ज नहीं किया गया है क्योंकि सभी नगर सेवक अपनी मर्जी से कहीं गए हुए माने जा रहे हैं.
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