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Kalyan Dombiwali Mahanagar Palika: महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर करवट लेती नजर आ रही है. मुंबई मेयर पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच अब कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका (केडीएमसी) में भी सत्ता का नया समीकरण सामने आया है. यहां भाजपा को झटका देते हुए एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) से हाथ मिला लिया है. यही नहीं, उद्धव ठाकरे गुट के दो पार्षदों ने भी शिंदे गुट को समर्थन देकर राजनीतिक हलचल और तेज कर दी है.
चुनाव नतीजों के बाद शुरू हुआ सत्ता निर्माण
नगर निगम चुनाव के नतीजे आने के बाद अब संख्या बल और सत्ता गठन की रणनीति पर जोर बढ़ गया है. कल्याण-डोंबिवली में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी शिंदे गुट की शिवसेना ने भाजपा की रणनीति को ही उसके खिलाफ इस्तेमाल करते हुए आंकड़ों का खेल साध लिया. मनसे के समर्थन और ठाकरे गुट के बागी पार्षदों की मदद से शिंदे गुट ने महापौर पद पर अपना दावा मजबूत कर लिया है. इसके चलते संकेत मिल रहे हैं कि चुनाव में गठबंधन के तहत साथ उतरी भाजपा को अब विपक्ष की भूमिका में बैठना पड़ सकता है.
तेजी से बदले राजनीतिक हालात
पिछले कुछ दिनों से कल्याण-डोंबिवली में राजनीतिक घटनाक्रम लगातार तेज हो रहा था. उद्धव ठाकरे गुट के चार पार्षद अचानक संपर्क से बाहर हो गए थे, जिससे सियासी अटकलें शुरू हो गई थीं. इसी बीच एक बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब नवी मुंबई स्थित कोंकण भवन में पार्षदों के समूह का पंजीकरण कराने पहुंचे शिंदे गुट ने अपनी चाल चल दी. सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने दावा किया कि केडीएमसी में शिवसेना (शिंदे) और मनसे का महापौर बनेगा.
शिंदे गुट का संख्या बल
शिंदे गुट ने कोंकण कमिश्नर के समक्ष नगर निगम में सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया है. शिंदे गुट के पास अपने 53 पार्षद हैं. इसके अलावा उद्धव ठाकरे गुट के 4 बागी पार्षद और मनसे के 5 सदस्य भी इस गठबंधन के साथ हैं. दिलचस्प बात यह है कि ठाकरे गुट के इन चार बागियों में से दो ने उद्धव गुट के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था, जबकि दो अन्य को शिंदे गुट से टिकट न मिलने के बाद ठाकरे गुट से चुनाव लड़ना पड़ा और वे जीत भी गए.
सीटों का गणित क्या कहता है
कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका में कुल 122 सीटें हैं. चुनाव नतीजों में शिंदे गुट की शिवसेना 53 सीटों के साथ सबसे आगे रही. भाजपा ने 50 सीटें जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया. इसके अलावा कांग्रेस को 2, एनसीपी को 1, उद्धव ठाकरे गुट को 2 और मनसे को 5 सीटें मिली हैं. मनसे के इन पांच में से दो पार्षद ऐसे हैं, जिन्होंने उद्धव गुट के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था.
भाजपा के लिए बढ़ी चुनौती
इस नए राजनीतिक समीकरण ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गठबंधन में चुनाव लड़ने के बावजूद सत्ता से दूर होने की आशंका ने पार्टी को असहज कर दिया है. वहीं, शिंदे गुट ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि स्थानीय स्तर पर सत्ता साधने में वह अब भी माहिर है
आगे की राजनीति पर असर
कल्याण-डोंबिवली में बना यह नया गठबंधन महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति में दूरगामी असर डाल सकता है. आने वाले समय में इसका प्रभाव मुंबई समेत अन्य महानगरपालिकाओं के समीकरणों पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है.
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