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राज्य में तीसरे चरण के जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के नतीजे सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपनी मजबूती साबित कर दी है। इन चुनावों में भाजपा ने न सिर्फ महायुति के सहयोगी दलों बल्कि महाविकास आघाड़ी के दलों को भी पीछे छोड़ते हुए सबसे ज्यादा सीटें हासिल की हैं। इन नतीजों से इस बात का भी संकेत मिलता है कि बीजेपी अब सिर्फ शहरी नहीं बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भी अपनी मज़बूत पकड़ बना चुकी है और सभी जगह पार्टी को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।
शनिवार 7 फरवरी को महाराष्ट्र के 12 जिला परिषद और 125 पंचायत समितियों के लिए मतदान हुआ था, जिनमें महाराष्ट्र का सातारा, सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, रायगढ़, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर शामिल हैं। सोमवार को आए नतीजों में महायुति को बंपर जीत मिली है। आंकड़ों के अनुसार 12 जिला परिषदों की कुल 731 सीटों में से महायुति गठबंधन ने 552 सीटों पर जीत हासिल की है और इन नतीजों में सबसे ज़्यादा सीट भारतीय जनता पार्टी को मिली हैं।
पिछले साल नवंबर में हुए नगर परिषद चुनाव, उसके बाद जनवरी में महाराष्ट्र के 29 महानगरपालिका चुनाव और अब फरवरी में जिला परिषद चुनाव से अब इस बात पर मुहर लग गई है की महाराष्ट्र की जनता बीजेपी की नीतियों और नेतृत्व के साथ मजबूती से जुड़ चुकी है और इन तीनों चुनावों में भाजपा की जीत किसी एक वजह से नहीं, बल्कि सुनियोजित तैयारी का परिणाम रही है। इस जीत का श्रय एक बार फिर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण को दिया जा रहा है और इन दोनों नेताओं की जोड़ी को महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे ज़्यादा प्रभावशाली माना जाने लगा है। संगठन को मजबूत करना, स्थानीय नेतृत्व को सक्रिय करना और शीर्ष नेतृत्व से सीधा संवाद बनाए रखना, यह सब इस जोड़ी की कार्यशैली का हिस्सा रहा। इसका असर यह हुआ कि पार्टी ने कई जिलों में अप्रत्याशित और ऐतिहासिक जीत हासिल की है।
महाराष्ट्र बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं। रविन्द्र चव्हाण का नाम महाराष्ट्र के उन कुछ रणनीतिकार और पार्टी के भरोसेमंद नेताओं में सुमार है जो जमीनी स्तर की राजनीति को समझते हैं और उसी के अनुरूप फैसले लेते हैं। रवीन्द्र चव्हाण को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भरोसेमंद साथी माना जाता है और मुख्यमंत्री का पूरा समर्थन भी उन्हें हासिल है, जिससे संगठन में स्पष्ट दिशा, अनुशासन और सक्रियता बनी हुई है। जिसका नतीजा विधानसभा चुनाव से लेकर पिछले तीनों चुनाव में दिखा है।
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