/newsnation/media/media_files/2026/01/15/voting-ink-facts-2026-01-15-19-10-43.jpg)
क्या स्याही मिटाई जा सकती है? Photograph: (X)
बीएमसी चुनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स यह दावा करता दिख रहा है कि वोट देने के बाद उंगली पर लगी चुनावी स्याही को उसने सैनेटाइजर की मदद से मिटा दिया. वीडियो में शख्स कहता है कि वोट देने के दो से तीन घंटे बाद सैनेटाइजर लगाने से उसकी उंगली से स्याही हट गई. इसके बाद सोशल मीडिया पर यह बहस तेज हो गई है कि क्या वास्तव में चुनाव में लगाई जाने वाली इंक को इतनी आसानी से मिटाया जा सकता है.
आखिर कब से हुई वोटिंग इंक की शुरुआत?
वोट देने के बाद उंगली पर स्याही लगाने की परंपरा इसलिए शुरू की गई ताकि यह साफ तौर पर साबित हो सके कि संबंधित व्यक्ति अपना वोट डाल चुका है. इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि कोई दूसरा व्यक्ति उसके नाम पर दोबारा वोट न कर सके. भारत में इस व्यवस्था को लागू करने का श्रेय देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन को दिया जाता है. चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा यह व्यवस्था अपनाई गई.
What is this @MaharashtraSEC ? You are using a marker instead of indelible ink which is easily removable even 2 hours after voting. We tried removing it using sanitizer and it was easily wiped out. Who will ensure it doesn't make way for fake or duplicate voting #BMCElections2026pic.twitter.com/fQl1xZK02d
— Tejas Joshi (@tej_as_f) January 15, 2026
कौन बनाता है चुनावी स्याही?
चुनाव के दिन लोग अक्सर अपनी उंगली पर लगी स्याही की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह स्याही कौन बनाता है. भारत में चुनावी स्याही बनाने की जिम्मेदारी कर्नाटक स्थित मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड के पास है. इस कंपनी की स्थापना साल 1973 में हुई थी. हालांकि कंपनी कई तरह के पेंट और वार्निश बनाती है, लेकिन इसकी पहचान मुख्य रूप से चुनावी स्याही के कारण है. यह कंपनी भारत के अलावा कई अन्य देशों को भी चुनावी स्याही की सप्लाई करती है.
कंपनी क्या दावा करती है?
कंपनी के अनुसार, चुनावी स्याही में सिल्वर नाइट्रेट नामक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. यह केमिकल त्वचा के संपर्क में आते ही ऑक्सीडाइज होकर गहरे रंग में बदल जाता है. कंपनी का दावा है कि यह स्याही कम से कम 72 घंटे तक नहीं मिटती और साबुन या पानी से इसे हटाना संभव नहीं होता. स्याही त्वचा की ऊपरी परत पर असर करती है और तभी हटती है, जब धीरे-धीरे त्वचा के पुराने सेल अपने आप झड़ते हैं.
कंपनी यह भी कहती है कि स्याही लगाने के करीब 40 सेकेंड के भीतर सूख जाती है, जिससे उसे तुरंत पोंछ पाना मुश्किल हो जाता है. वहीं वायरल वीडियो में किया गया दावा कि स्याही तीन से चार घंटे में सैनेटाइजर से मिट गई, इन आधिकारिक दावों के विपरीत है.
ये भी पढ़ें- BMC Elections: ‘महिलाओं की जगह पुरुषों का नाम लिखा हुआ है’, बीएमसी चुनावों के बीच विपक्ष का आरोप
वायरल वीडियो से उठे सवाल
इस वीडियो के सामने आने के बाद यह सवाल जरूर खड़ा हुआ है कि क्या चुनावी स्याही की गुणवत्ता में कोई कमी है या फिर वीडियो में दिखाया गया दावा पूरी तरह सही नहीं है. फिलहाल इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि स्याही का असर व्यक्ति की त्वचा, केमिकल के संपर्क और समय पर भी निर्भर करता है. ऐसे में वायरल दावों पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक जानकारी और जांच का इंतजार करना जरूरी है.
नोट- वायरल वीडियो की पुष्टि न्यूज़ नेशन नहीं करता है.
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us