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BMC Election Mahayuti wins Photograph: (NN)
BMC Election Result: महानगरपालिका चुनावों के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा प्रस्तुत ‘विकसित महाराष्ट्र’ का विजन शहरी मतदाताओं के दिल और दिमाग तक पहुंच चुका है. विकास, सुशासन और स्थिर नेतृत्व के एजेंडे पर जनता ने भाजपा को खुलकर समर्थन दिया. पहले महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव और अब बीएमसी चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत ने ना सिर्फ़ मुंबई में ठाकरे का किला ढहा दिया बल्कि महाराष्ट्र में विपक्ष के तमाम मुद्दों को भी गैर जरूरी ठहरा दिया है. इसी के साथ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के उस आह्वान को भी व्यापक स्वीकृति मिली, जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से विचारधारा के साथ मजबूती से खड़े रहने की अपील की थी. नतीजों में यह समर्थन पूरी मजबूती के साथ दिखाई दिया.
भाजपा की है ये खासियत
भाजपा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पार्टी ने केवल नीतियां नहीं बनाईं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की क्षमता भी दिखाई. चुनावी रणनीति, टिकट वितरण, प्रचार सभाओं की योजना और विपक्ष की कमजोरियों की सटीक पहचान में देवेंद्र फडणवीस और रविंद्र चव्हाण की जोड़ी पूरी तरह सफल रही. सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय को राजनीतिक विश्लेषक इस ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी वजह मान रहे हैं.
संगठन की ताकत ने पहले ही दिला दी थी आधी जीत
जनवरी में जब रविंद्र चव्हाण ने भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी, तब उन्होंने डेढ़ करोड़ प्राथमिक सदस्यों का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया. उसी समय यह संकेत मिल गया था कि भाजपा संगठनात्मक स्तर पर चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है. मजबूत बूथ मैनेजमेंट, सक्रिय कार्यकर्ता और स्पष्ट दिशा ने भाजपा को पहले ही बढ़त दिला दी थी, जो अब चुनावी नतीजों में तब्दील होती दिखी. इसी के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की जोड़ी भाजपा की एक नई, निर्णायक और चुनाव जिताऊ ताकत के रूप में उभरकर सामने आई है.
कैसी है रविंद्र चव्हाण की छवि
रविंद्र चव्हाण की पहचान सड़क पर उतरकर संघर्ष करने वाले और जमीन से जुड़े कार्यकर्ता की है. चुनाव के दौरान उनके बयानों और पहनावे को लेकर भी व्यक्तिगत आलोचना की गई लेकिन उन्होंने उसका जवाब नहीं दिया, बल्कि विपक्ष को गैरजरूरी मुद्दों में उलझाकर भाजपा के लिए जीत का रास्ता और आसान कर दिया. जनता ने भी यह साफ संदेश दे दिया कि व्यक्तिगत हमलों की राजनीति की कोई खास कीमत नहीं है.
फडणवीस–चव्हाण की केमिस्ट्री बनी जीत की कुंजी
अपने करीब 25 वर्षों के राजनीतिक सफर में रविंद्र चव्हाण हर आलोचना के बाद और अधिक मजबूती के साथ उभरते नजर आए हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की क्षमताओं से भली-भांति परिचित हैं. चव्हाण के शहरी महाराष्ट्र की राजनीति का अनुभव और उनकी हमेशा ‘इलेक्शन रेडीनेस’ वाली कार्यशैली भाजपा के लिए निर्णायक साबित हुई.
रणनीतिक क्षमता और दूरदर्शिता भी हुई साबित
महाराष्ट्र सरकार में सार्वजनिक बांधकाम मंत्री के रूप में करीब ढाई वर्षों के कार्यकाल में रविंद्र चव्हाण ने पूरे महाराष्ट्र का दौरा किया. इस दौरान विकास कार्यों के जरिए उन्होंने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया, जिसका लाभ आज भाजपा को मिला. वहीं प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की रणनीतिक क्षमता और दूरदर्शिता भी पूरी तरह साबित हुई है. जैसे-जैसे जीत के पूरे आंकड़े सामने आए हैं, यह और स्पष्ट हो गया कि यह सफलता केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि देवेंद्र के विजन और रविंद्र के मिशन की सामूहिक उपलब्धि है.
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