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महाराष्ट्र के निकाय चुनावों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. ठाणे जिले के अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा ने सभी को चौंका दिया है. नगर अध्यक्ष पद को लेकर कब्जा जमाया गया है. यहां दिलचस्प बात रही है कि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के गृह जिले में भाजपा और कांग्रेस के अप्रत्याशित समर्थन से बहुमत हासिल हुआ है. इससे एकनाथ शिंदे की शिवसेना को बड़ा झटका लगा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के साथ इस अप्रत्याशित गठजोड़ से सीएम देवेंद्र फडणवीस भी काफी नाराज बताए जा रहे हैं. इस बीच शिवसेना (यूबीटी) ने भी भाजपा और कांग्रेस के बीच अप्रत्याशित गठजोड़ पर काफी आलोचना की है.
62 सीटें सौंपने को तैयारी
आपको बता दें कि महराष्ट्र में कांग्रेस संघर्ष कर रही है. 2014 में मुंबई से पार्टी के सफाए के बाद दोबारा से कांग्रेस अपना मुकाम हासिल नहीं कर पाई है. कभी महानगर की 6 में से 5 लोकसभा सीटें पार्टी के पास हुआ करती थीं. इस बार पार्टी ने संगठन में जोश भरा है. उसने अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है. मगर ऐन वक्त पर वंचित बहुजन आघाडी को 62 सीटें सौंपने को तैयारी हो गई.
कांग्रेस 50 से अधिक सीटों को जीत का सपना देख रही
हर बार कैंडिडेट की लिस्ट देरी से जारी हुई. कांग्रेस को मुस्लिम और दलित वोटो के साथ अन्य वोटो पर भी भरोसा है. कांग्रेस 50 से अधिक सीटों को जीत का सपना देख रही है. मगर मुस्लिम वोटों के लिए UBT के अलावा सपा, एनसीपी (AP) और AIMIM जैसी पार्टियां भी मैदान में होंगी.
बीएमसी चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका लगा है, कई कांग्रेस उम्मीदवार भाजपा में शामिल हो चुके हैं. इनमें पूर्व मेयर शुभा राउल भी शामिल हैं. उन्होंने सीएम देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली है. इसके अलावा, पूर्व कांग्रेस कॉरपोरेटर रवि राजा भी भाजपा में शामिल हो गए हैं.
कांग्रेस के लिए चुनौतियां
कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के बीच गठबंधन टूट गया है. इसे कांग्रेस के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं. वीबीए ने मुंबई के पांच वार्डों में अपने उम्मीदवार बनाए रखने का फैसला किया है. इससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है.
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