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file photo Photograph: (social media)
जनता के बीच लंबे समय से यह डिमांड रही है कि राजनीति में पढ़े लिखों का आना बहुत जरूरी है ताकि वह समस्याओं को समझकर उसका हल ​निकाला जा सके. यह कामना अब पूरी होती दिख रही है. उच्च शिक्षित पेशेवर तेजी से चुनावी मैदान में उतर रहे हैं. इस बार बीएमसी चुनाव में डॉक्टरों और वकीलों ने भी अपना नामांकन दाखिल किया है. आगामी चुनावों में 50 अधिवक्ताओं ने उम्मीदवार के रूप में पंजीकरण कराया है. वे मतदाताओं को आश्वस्त कर रहे हैं कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा को लेकर कानूनी दायरे में रहते हुए जनहित के मामलों पर काम करेंगे.
50 अधिवक्ता विभिन्न वार्डों से चुनाव में खड़े हो रहे
ये 50 अधिवक्ता विभिन्न वार्डों से चुनाव में खड़े हो रहे हैं. वकील उम्मीदवार नगर प्रशासन में कानूनी पेशेवरों की भूमिका पर प्रकाश डाल रहे हैं. बीते चार-पांच सालों में मुंबई में कई तरह के बदलाव देखे गए हैं. वे अपने चुनाव प्रचार में मतदाताओं को बताने की कोशिश कर रहे हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा,जल आपूर्ति और अन्य नगरपालिका समस्याओं से जुड़े नागरिक मुद्दों को हल करने को लेकर शिक्षित लोगों का होना बहुत जरूरी है.
उम्मीदवारों को स्थानीय मामलों की जानकारी
हालांकि, अब यह पैटर्न पूरी तरह से बदल चुका है. अधिवक्ता उम्मीदवारों को स्थानीय मामलों की जानकारी है. वे यह आश्वासन दे रहे हैं कि वे कानून की सीमाओं को अंदर रहते हुए आम नागरिकों के अधिकारों और हक पर काम कर सकते हैं. इस बार BMC चुनाव में 227 वार्डों में कुल 1700 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. कुछ पार्षदों ने जानकारी दी कि उनकी संपत्ति बिजनेस, खेती, निवेश और किराए की आमदनी से हो रही है.
कैश से लेकर बढ़ा इन्वेस्टमेंट
घर, फ्लैट, कमर्शियल प्रॉपर्टी, प्लॉट समेत बैंक डिपॉजिट और इन्वेस्टमेंट में काफी बढ़ोतरी हुई है. हालांकि कुछ पुराने पार्षदों ने जानकारी दी कि उनकी इनकम का सोर्स बिजनेस, खेती, किराए की इनकम के साथ सैलरी से हो रही है. संपत्ति में तेजी से बढ़ोतरी वोटर्स के लिए उत्सुकता का विषय रहा है.
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