Mumbai Mayor: मुंबई मेयर पद पर फंसा पेंच, महायुति को बहुमत मिलने के बावजूद एकनाथ शिंदे और बीजेपी की दावेदारी से उलझा मामला

Mumbai Mayor: बीएमसी चुनाव में महायुति की बड़ी जीत के बाद मेयर पद को लेकर सियासी खींचतान शुरू हो गई है. एकनाथ शिंदे की शिवसेना और बीजेपी के बीच इस पद के लिए दांव-पेच जारी है.

Mumbai Mayor: बीएमसी चुनाव में महायुति की बड़ी जीत के बाद मेयर पद को लेकर सियासी खींचतान शुरू हो गई है. एकनाथ शिंदे की शिवसेना और बीजेपी के बीच इस पद के लिए दांव-पेच जारी है.

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Deepak Kumar
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Mumbai Mayor: मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में दशकों बाद भगवा लहराया है. महायुति ने शानदार जीत दर्ज की है, जिससे मुंबई से लेकर दिल्ली तक जश्न का माहौल है. हालांकि इस बड़ी जीत के बाद अब सबसे बड़ा पेंच मेयर पद को लेकर फंस गया है. महायुति में शामिल दलों के बीच मेयर को लेकर खींचतान तेज हो गई है.

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BJP-शिवसेना के बीच सियासी संग्राम

सूत्रों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे की शिवसेना मेयर पद पर अड़ी हुई है. शिंदे गुट चाहता है कि चाहे ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला लागू हो, लेकिन पहले कार्यकाल में मेयर शिवसेना का ही बने. इसी बीच एकनाथ शिंदे को अपने नगरसेवकों के टूटने का डर भी सता रहा है. इसी वजह से शिवसेना (शिंदे गुट) के 29 नगरसेवकों को पिछले तीन दिनों से बांद्रा के एक लग्जरी होटल में ठहराया गया है. डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे खुद होटल पहुंचकर नगरसेवकों से मिले और उन्हें जीत की बधाई दी.

उद्धव ठाकरे का सियासी दांव

मेयर पद की इस खींचतान के बीच उद्धव ठाकरे ने भी बड़ा सियासी दांव चल दिया है. उनका मकसद शिंदे गुट को मेयर पद से दूर रखना बताया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे की शिवसेना का कहना है कि अगर बीजेपी मेयर पद के लिए आगे आती है, तो उनके 65 जीते हुए नगरसेवक वोटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे. यानी वे मतदान के दिन अनुपस्थित रहेंगे. अगर ऐसा होता है तो बहुमत का आंकड़ा काफी नीचे आ जाएगा और मेयर चुनाव और उलझ सकता है.

कब मिलेगा मुंबई को नया मेयर?

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि बीएमसी में मेयर को लेकर सियासी संकट गहराता जा रहा है. सवाल यह है कि मुंबई को मेयर कब मिलेगा और आखिर मेयर किस पार्टी का होगा. वहीं उद्धव गुट लगातार महायुति पर तंज कस रहा है और अपने “जादुई आंकड़े” की बात कर रहा है. दूसरी ओर महायुति की सहयोगी पार्टी आरपीआई का कहना है कि आपसी बातचीत से मामला सुलझा लिया जाएगा और मेयर महायुति का ही बनेगा. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, इसलिए उसका दावा भी मजबूत है. लेकिन शिंदे की अड़ियल नीति ने इस पूरे मामले को और जटिल बना दिया है.

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