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Bhima Koregaon case: शुक्रवार को गौतम नवलखा और NIA की दलीलों पर सुनवाई

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 17 Nov 2022, 05:19:23 PM
Gautam Navlakha

(source : IANS) (Photo Credit: Twitter)

नई दिल्ली:  

सुप्रीम कोर्ट भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी एक्टिविस्ट गौतम नवलखा की एक नई याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमत हो गया है, गौतम को कोर्ट के आदेश के बावजूद हाउस अरेस्ट (नजरबंद) में शिफ्ट नहीं किया गया है. गुरुवार को नवलखा के वकील द्वारा मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया गया था. वकील ने प्रस्तुत किया कि हाउस अरेस्ट के संबंध में शीर्ष अदालत के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है और आदेश 10 नवंबर को पारित किया गया था.

एनआईए का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि नवलखा ने अपने घर का पता देने के बजाय, कम्युनिस्ट पार्टी से संबंधित एक पुस्तकालय-सह-आवासीय का पता दिया है. नवलखा के वकील ने मेहता की दलीलों का विरोध किया. वकील ने कहा कि यह उल्लेख किया गया था कि यह पुस्तकालय है.

मेहता ने कहा कि एनआईए की भी अदालत से कुछ मांग है और उसने आवेदन दायर किया है. मेहता ने अदालत से मामले को सोमवार के लिए सूचीबद्ध करने को कहा. दोनों को सुनने के बाद, शीर्ष अदालत ने कहा कि वह आरोपी और एनआईए द्वारा दोनों याचिकाओं को सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष शुक्रवार को सूचीबद्ध करेगी, इसी पीठ ने हाउस अरेस्ट का आदेश पारित किया था.

शीर्ष अदालत ने 10 नवंबर को नवलखा को उनके बिगड़ते स्वास्थ्य पर विचार करने के बाद नजरबंद की अनुमति दी थी और उन्हें 14 नवंबर तक स्थानीय जमानत के तौर पर 2 लाख रुपये जमा करने को भी कहा था. शीर्ष अदालत ने कई शर्तें लगाते हुए 70 वर्षीय गौतम नवलखा को मुंबई में एक महीने के लिए नजरबंद रखने की अनुमति दी. पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता को कम से कम सुनवाई की अगली तारीख तक हाउस अरेस्ट में रखने की अनुमति देनी चाहिए, 13 दिसंबर को अगली सुनवाई के लिए मामले का समय निर्धारित किया गया है.

इससे पहले, 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने तलोजा जेल अधीक्षक को नवलखा को तुरंत इलाज के लिए मुंबई के जसलोक अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्देश दिया था. नवलखा ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 26 अप्रैल के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसने मुंबई के पास तलोजा जेल में पर्याप्त चिकित्सा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी की आशंकाओं पर नजरबंदी की उनकी याचिका को खारिज कर दिया था. अगस्त 2018 में, उन्हें गिरफ्तार किया गया था और शुरू में घर में नजरबंद रखा गया था. अप्रैल 2020 में, शीर्ष अदालत के एक आदेश के बाद उन्हें महाराष्ट्र के तलोजा केंद्रीय जेल में भेज दिया गया.

First Published : 17 Nov 2022, 05:19:23 PM

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