ट्रायल जज बदले जाने से फिर चर्चा में बालगंगा सिंचाई घोटाला, जानें क्या है पूरा मामला?

Balganga Dam Scam: महाराष्ट्र के रायगड़ जिले की बालगंगा बांध परियोजना और उससे जुड़ा घोटाला एक बार फिर से चर्चा में आ गया है. इस बार चर्चा की वजह ट्रायल जज का ट्रांसफर है. चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला?

Balganga Dam Scam: महाराष्ट्र के रायगड़ जिले की बालगंगा बांध परियोजना और उससे जुड़ा घोटाला एक बार फिर से चर्चा में आ गया है. इस बार चर्चा की वजह ट्रायल जज का ट्रांसफर है. चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला?

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Pankaj R Mishra
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Balganga dam scam

फिर चर्चा में बालगंगा सिंचाई घोटाला Photograph: (प्रतीकात्मक फोटो)

Balganga Dam Scam: महाराष्ट्र के रायगड़ जिले की बालगंगा बांध परियोजना और इससे जुड़ा घोटाला एक बार फिर से चर्चा में आ गया है. इस बार चर्चा की वजह इस केस के ट्रायल जज को बदला जाना है. आरोप है कि जिस केस में वर्षों बाद सुनवाई ने रफ्तार पकड़ी थी, उस केस में अचानक ऐसा क्या हुआ कि ट्रायल के दौरान ही प्रशासनिक आदेश के तहत मामला एक जज से दूसरे जज को सौंप दिया गया.

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सवाल इसलिए भी पूछे जा रहे हैं क्योंकि हाल ही में मामले के आरोपी ने न्यायिक स्तर पर केस को दूसरे मजिस्ट्रेट को सौंपने के लिए याचिका लगाई थी. हालांकि प्रधान सत्र न्यायाधीश ने इस याचिका को निरर्थक बताते हुए खारिज कर दिया और आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. जब न्यायिक स्तर पर ट्रांसफर की मांग को खारिज किया जा चुका था उसके बाद भी केस में जज का बदला जाना क्या महज नियमित प्रक्रिया है या इसके पीछे कोई और वजह है.

92 करोड़ के नुकसान का आरोप, 30 हजार पन्नों की चार्जशीट

बता दें कि महाराष्ट्र पुलिस की एंटी करप्शन ब्यूरो ने साल 2016 में बालगंगा डैम सिंचाई घोटाले की जांच पूरी कर ठेकेदार निसार खत्री और कोंकण सिंचाई विकास महामंडल (KIDC) से जुड़े कई अधिकारियों के खिलाफ करीब 30 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. इस चार्जशीट में ACB ने परियोजना में गंभीर अनियमितताओं के चलते राज्य के खजाने को 92 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की जानकारी दी थी.

ये मामला इतना बड़ा होने के बाद भी इस केस में सालों तक ना तो आरोप तय हो पाया और न ही ट्रायल आगे बढ़ रहा था. लेकिन लंबे इंतजार के बाद साल 2025 में विशेष न्यायाधीश जी. टी. पवार ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर ट्रायल की औपचारिक शुरुआत की जिससे यह उम्मीद बनी कि मामला अब निर्णायक दिशा में आगे बढ़ेगा. 

प्रशासनिक आदेश, राजनीतिक और कानूनी बहस तेज

इस पूरे मामले में कानूनी जानकारों का कहना है कि प्रशासनिक तबादले सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन ट्रांसफर याचिका खारिज होने और जुर्माना लगाए जाने की पृष्ठभूमि में यह बदलाव असामान्य प्रतीत होता है. इस विवाद को और हवा इस बात से मिल रही है कि राज्य सरकार ने अक्टूबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा निसार खत्री को बालगंगा डैम मामले में 303 करोड़ रुपये देने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी थी.

इस मामले में राजनीतिक असर भी गहरा रहा है. कभी इस घोटाले ने तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया था. उस समय विपक्ष के नेता रहे देवेंद्र फडणवीस ने इसे भ्रष्टाचार का प्रतीक बताते हुए जोर-शोर से मुद्दा उठाया था. लेकिन इन सबके बावजूद अब प्रशासनिक आदेश के तहत मामला न्यायाधीश जी. टी. पवार से हटाकर न्यायाधीश दुर्गाप्रसाद देशपांडे को सौंप दिया गया है.

सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी, जिसमें निसार खत्री को 303 करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी. कभी कांग्रेस-एनसीपी सरकार को घेरने वाला यह घोटाला एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में आ गया है.

MAHARASHTRA NEWS
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