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Madhya Pradesh: शिवराज सिंह चौहान ने खोला राज, इसलिए गिरी कमलनाथ सरकार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से कमलनाथ के इस्तीफे के बाद पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि इसलिए कमलनाथ सरकार गिरी है.

News Nation Bureau | Edited By : Deepak Pandey | Updated on: 20 Mar 2020, 06:20:34 PM
kamal nath shivraj chauhan

शिवराज सिंह चौहान और कमलनाथ (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री पद से कमलनाथ के इस्तीफे के बाद पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस की सरकार अपने बोझ से गिरी है. सरकार गिराने के लिए भाजपा द्वारा षडयंत्र किए जाने के कमलनाथ के आरोपों पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं 13 साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके चौहान ने संवाददताओं से कहा, भाजपा कभी सत्ता गिराने बचाने के खेल में नहीं रही. अपने बोझ से यह (कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस नीत) सरकार गिरी है.

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शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘‘यह सरकार अपने अंतर्द्वंद से गिरी है. (कांग्रेस नेताओं में) आंतरिक कलह के कारण गिरी है.’’ मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से ठीक पहले कमलनाथ ने यहां मुख्यमंत्री निवास पर प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाया था कि मेरी सरकार को अस्थिर कर भाजपा प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता के साथ विश्वासघात कर रही है. उसे यह भय सता रहा है कि यदि मैं प्रदेश की तस्वीर बदल दूंगा तो प्रदेश से भाजपा का नामोनिशान मिट जाएगा.

इसके अलावा कमलनाथ ने कहा कि किस प्रकार करोड़ों रुपये खर्च कर प्रलोभन का खेल खेला गया जनता द्वारा नकारे गए एक तथाकथित महत्वाकांक्षी, सत्तालोलुप ‘महाराज’ (ज्योतिरादित्य सिंधिया) और उनके द्वारा प्रोत्साहित 22 लोभियों के साथ मिलकर भाजपा ने खेल रच लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की। इसकी सच्चाई थोड़े ही समय में सभी के सामने आएगी.

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कमलनाथ की छोटी सी लालच के चलते कांग्रेस के 'हाथ' से निकल गया मध्‍य प्रदेश

बता दें कि होली के दिन ही ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) से मुलाकात की थी और शाम को कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को इस्‍तीफा भी भेज दिया था. इसके बाद ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया खेमे के 22 विधायकों ने विधानसभा अध्‍यक्ष को अपना इस्‍तीफा भेज दिया था. यह सब हुआ मुख्‍यमंत्री कमलनाथ की एक छोटी सी लालच के चलते. अगर सीएम कमलनाथ प्रदेशाध्‍यक्ष पद छोड़ देते तो न ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया नाराज होते और न ही उनकी सरकार जाती और न ही कांग्रेस के हाथ से मध्‍य प्रदेश जैसा बड़ा राज्‍य हाथ से निकलता.

जब कांग्रेस ने सरकार बनाई थी, तब सिंधिया सीएम पद के लिए अड़े हुए थे

2018 में जब कांग्रेस ने राज्‍य में सरकार बनाई थी, तब ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया सीएम पद के लिए अड़े हुए थे. लेकिन आलाकमान ने कमलनाथ के नाम पर मुहर लगाई. राहुल गांधी ने किसी तरह ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को मनाया और कमलनाथ-सिंधिया को वारियर करार दिया था. सिंधिया गुट का कहना है कि उस समय कांग्रेस आलाकमान की ओर से ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को प्रदेशाध्‍यक्ष बनाने की बात कही थी. ज्‍योतिरादित्य सिंधिया इंतजार करते रहे, लेकिन कमलनाथ सीएम के अलावा पीसीसी चीफ पद पर भी चिपके रहे.

हद तो तब हो गई, जब कमलनाथ गुट सिंधिया गुट को पार्टी में ठिकाने लगाने पर आमादा हो गया. लोकसभा चुनाव हारने के बाद से कमलनाथ गुट कांग्रेस में हावी हो गया और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को किनारे लगाने की रणनीति पर काम प्रारंभ हो गया. लोकसभा चुनाव हारने के बाद ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया की आखिरी उम्‍मीद राज्‍यसभा चुनाव पर टिकी थी, लेकिन उसमें कमलनाथ और दिग्‍विजय सिंह का गुट एक हो गया और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को दरकिनार करने की रणनीति बनने लगी. इसकी भनक ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को लग गई थी.

कमलनाथ और सिंधिया के बीच चल रही थी हॉट टॉक

इस बीच ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने किसानों की एक सभा की, जिसमें उन्‍होंने सड़क पर उतरने की बात कही थी और जवाब में कमलनाथ ने कह दिया- उन्‍हें सड़क पर उतरना है तो उतर जाएं. फिर क्‍या था, ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया की भृकुटि तन गई और प्रदेश में ऑपरेशन कमल प्रारंभ हो गया. जानकारों की मानें तो सबसे पहले ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने अपने गुट के विधायकों से बात की और उन्‍हें बड़े कदम उठाने को लेकर मुतमईन किया. उसके बाद वे बीजेपी के आला नेताओं से मिले और फिर सोनिया गांधी को अपना इस्‍तीफा भेज दिया.

कांग्रेस को उम्‍मीद थी कि सत्‍ता के लालच और विधायकी जाने के डर से ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया गुट के विधायक उनके साथ नहीं जा पाएंगे और कमलनाथ सब मैनेज कर लेंगे, लेकिन यह अंदाजा गलत निकला. ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने तगड़ा दांव खेलते हुए इस्‍तीफा देने से पहले ही विधायकों को बीजेपी की मदद से बेंगलुरू के रिजॉर्ट में पहुंचवा दिया था.

First Published : 20 Mar 2020, 06:03:12 PM

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