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झारखंड में वोट बैंक साधने के लिए पार्टियां तैयार, जानिए सीट का समीकरण

देश में चुनावी उद्घोष हो चुका है और पार्टियों ने वोट बैंक साधने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया है. बात करें झारखंड की तो यहां सियासी दलों की नजर एससी, एसटी और ओबीसी वोटर्स पर है.

Updated on: 27 Oct 2023, 04:10 PM

highlights

  • झारखंड में चुनाव से पहले सियासत तेज
  • वोट बैंक साधने के लिए पार्टियां तैयार
  • 81 सीटों में 37 सीटें आरक्षित

 

Ranchi:

देश में चुनावी उद्घोष हो चुका है और पार्टियों ने वोट बैंक साधने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया है. बात करें झारखंड की तो यहां सियासी दलों की नजर एससी, एसटी और ओबीसी वोटर्स पर है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत का स्वाद चखने वाली कांग्रेस झारखंड में भी वही फॉर्मूला अपनाने की तैयारी में है. दरअसल, कर्नाटक में कांग्रेस की प्रचंड जीत में SC-ST की आरक्षित सीटों का बड़ा योगदान है. ऐसे में झारखंड में भी कांग्रेस इसी परिपाटी को लागू करने की तैयारी में है. यही वजह है कि प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की नजर सूबे के एससी, एसटी और ओबीसी वोट पर है. पार्टी खुद को पिछड़ा वर्ग हितैषी बता रही है. कांग्रेस की मानें तो अब तक के नेतृत्व में जो सेकेंड लाइन लीडरशिप लाना चाहते हैं, वो नहीं आ पाया है. इसलिए पार्टी ने तय किया है कि जितने भी एससी और एसटी आरक्षित लोकसभा सीट है, उनपर फोकस कर सेकेंड और थर्ड लाइन लीडर को तराश कर आगे लाया जाएगा और उन्हें नेतृत्व करने का मौका दिया जाएगा.

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वोट बैंक साधने के लिए पार्टियां तैयार

एससी, एसटी और ओबीसी के लीडरशीप को मजबूती देने में जुटी कांग्रेस की कोशिश बीजेपी को रास नहीं आ रही है. जहां बीजेपी कांग्रेस पर जमकर निशाना साध रही है. बीजेपी सांसद आदित्य साहू ने कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा कि कांग्रेस को बताना चाहिए कि झारखंड में एससी, एसटी और ओबीसी समाज के लिए क्या-क्या काम हुआ है. बीजेपी के वार पर प्रदेश के पेयजल मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने पलटवार किया. जहां उन्होंने कहा कि बीजेपी कागजों में अच्छा काम करती है और ये बात एससी, एसटी समुदाय के लोग भी अच्छी तरह से जानते हैं.

81 सीटों में 37 सीटें आरक्षित

झारखंड विधानसभा की 81 सीटों में 37 सीटें आरक्षित हैं. इसमें अनुसूचित जाति (SC) के लिए 09, अनुसूचित जनजाति के लिए 28 सीटें आरक्षित हैं. साल 2019 के चुनावी रिजल्ट को देखें तो आरक्षित सीटों पर कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं था. कांग्रेस 2019 में अनुसूचित जाति आरक्षित 9 सीटों में से एक भी सीट नहीं जीत पाई थी. वहीं, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 9 में से 6 सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, जबकि JMM ने 2 और RJD ने एक सीट पर जीत कब्जा किया था. 

वहीं, ST के लिए आरक्षित 28 सीटों में से JMM ने 18 सीटें जीती थी. कांग्रेस ने 07 और बीजेपी को तीन सीटें मिली थी. 2019 के चुनावी नतीजों के साफ है कि प्रदेश में कांग्रेस ने आरक्षित सीटों पर बढ़िया प्रदर्शन नहीं किया था. ऐसे में इस बार पार्टी ने पहले से ही इन सीटों को साधने की तैयारी कर ली है. हालांकि पार्टी को इन कोशिशों का कितना फायदा मिलने वाला है. ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.