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पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी की हो सकती है 'घर वापसी', ले सकते हैं ये बड़ा फैसला

विधानसभा (Jharkhand Assembly Elections 2019) में हार के बाद अब बीजेपी (BJP) अपना नेतृत्व सुधारने की कोशिश कर रही है. इसी क्रम में झारखंड बीजेपी (Jharkhand BJP) में पुराने नेताओं की वापसी भी हो सकती है.

News Nation Bureau | Edited By : Vikas Kumar | Updated on: 07 Jan 2020, 11:32:53 AM
पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी की हो सकती है 'घर वापसी

पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी की हो सकती है 'घर वापसी (Photo Credit: फाइल फोटो)

highlights

  • विधानसभा (Jharkhand Assembly Elections 2019) में हार के बाद अब बीजेपी (BJP) अपना नेतृत्व सुधारने की कोशिश कर रही है. 
  • इसी क्रम में झारखंड बीजेपी (Jharkhand BJP) में पुराने नेताओं की वापसी भी हो सकती है.
  • सूत्रों के अनुसार, झारखंड विकास मोर्चा के संस्थापक बाबूलाल मरांडी अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में कर सकते हैं.

रांची:

विधानसभा (Jharkhand Assembly Elections 2019) में हार के बाद अब बीजेपी (BJP) अपना नेतृत्व सुधारने की कोशिश कर रही है. इसी क्रम में झारखंड बीजेपी (Jharkhand BJP) में पुराने नेताओं की वापसी भी हो सकती है. इसकी शुरुआत भी हो चुकी है, जहां राज्य के पुर्व सीएम भाजपा और झारखंड विकास मोर्चा (Jharkhand Vikas Morcha) के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की घर वापसी हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, झारखंड विकास मोर्चा के संस्थापक बाबूलाल मरांडी अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में कर सकते हैं. इसके बदले पार्टी उन्हें झारखंड में अपना चेहरा बना सकती है. रविवार को भाजपा विधायक दल की बैठक हुई, लेकिन नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं किया गया। नेता का चयन खरमास तक के लिए टाल दिया गया। इधर, बाबूलाल मरांडी ने अपनी पार्टी की कार्यसमिति को भंग कर दिया। खरमास बाद इस पर पुनर्विचार की बात कही। खरमास के संयोग से बाबूलाल के भाजपा में शामिल होने की अटकलों को बल मिलता नजर आ रहा है।

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इधर बाबूलाल के रुख को लेकर उनके दल के विधायक भी अभी संशय में हैं. बाबूलाल ने कमेटी भंग की तो प्रदीप यादव ने सवाल उठाया कि ऐसा करना कोई जरूरी नहीं था। इन्हीं बातों से नाराज प्रदीप और बंधु के कांग्रेस में जाने की चर्चा भी जोरों पर है। वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में भी हैं।

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बाबूलाल मरांडी के भाजपा में शामिल होने की अटकलें भले ही जोरों पर हो, लेकिन झाविमो प्रमुख का अब तक का रुख इसे खारिज करता नजर आता है। बाबूलाल ने खुद हेमंत सोरेन सरकार को अपनी पार्टी का समर्थन दे रखा है। महज दस दिन बाद वे अपने रुख से कैसे पलटेंगे यह बड़ा सवाल है.

First Published : 07 Jan 2020, 11:32:53 AM

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