/newsnation/media/media_files/2026/01/14/who-is-sheeba-ashraf-2026-01-14-14-02-33.jpg)
शीबा अशरफ, जम्मू-कश्मीर की युवा साहित्यकार Photograph: (X@GreaterKashmir)
Who is Sheeba Ashraf: जम्मू-कश्मीर का अनंतनाग जिला राज्य के आतंकवाद से ग्रस्त जिलों में शामिल है. जहां आए दिन दहशतगर्द अपनी नापाक साजिशों को अंजाम देने की कोशिश में सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाते हैं. अब अनंतनाग की पहचान 14 वर्षीय एक युवा साहित्यकार से होने रहे हैं. इस युवा साहित्यकार का नाम है शीबा अशरफ. दरअसल, सिर्फ 14 साल की शीबा अशरफ कश्मीर की सबसे कम उम्र की उर्दू लेखिका बन गई हैं. उन्होंने 'ए मुश्त-ए-ख़ाक' नाम की एक किताब लिखी है. ये किताब कविता और गद्य का मिश्रण है.
कौन हैं शीबा अशरफ?
शीबा अशरफ जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले की कोकरनाग की रहने वाली हैं. अभी उनकी उम्र सिर्फ 14 वर्ष है, लेकिन उन्होंने इस उम्र में ए मुश्त-ए-ख़ाक नाम की किताब उर्दू में लिखकर इतिहास रच दिया है और वह राज्य की सबसे कम उम्र की साहित्यकार बनने का गौरव हासिल किया है. शीबा अशरफ अभी नौवीं क्लास में पढ़ती हैं. लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ उनकी साहित्य में भी गहरी रुचि है. जिसके चलते उन्होंने इतनी कम उम्र में किताब लिख दी. शीबा ने अपनी किताब में भावनाओं, आत्मअनुभवों और जीवन के सूक्ष्म पहलुओं के बारे में उर्दू में लिखा है. शीबा का कहना है कि लेखन उनके लिए सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि अपने विचारों और भावनाओं को आजाद करने का जरिया है.
#Watch | 14-year-old Sheeba Ashraf from Kokernag has authored a philosophical book in Urdu, blending poetry and prose. Inspired by Rabindranath Tagore, Allama Iqbal, Mirza Ghalib, she aspires to become a distinguished writer one day#urdupoetry#allamaiqbal#youngwriter#GKTVpic.twitter.com/5X8LQgEeU0
— Greater Kashmir (@GreaterKashmir) January 13, 2026
टैगोर, इकबाल और मिर्जा गालिब को मानती हैं प्रेरणा
जम्मू-कश्मीर के एक छोटे से कस्बे में जन्मी और पली बढ़ी शीबा को लेखन की प्रेरणा प्रसिद्ध लेखकों से मिली. जिनमें रवींद्रनाथ टैगोर, अल्लामा इकबाल और मिर्जा गालिब का नाम शामिल है. शीबा के लिए ये उपलब्धि हासिल करना आसान नहीं रहा, लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत, लगन और परिवार के सहयोग से 14 साल की उम्र में किताब की रचना कर दी. उनकी ये सफलता जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं और युवतियों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है. शीबा अशरफ ये बताती है कि अगर हौसले बुलंद हों तो उम्र की सीमाओं को भी तोड़ा जा सकता है.
क्या है शीबा का संदेश?
कश्मीर की युवा उर्दू साहित्यकार का कहना है कि हमें वैश्विक भाईचारे के सिद्धांत को भूलना नहीं है तभी हम तरक्की कर सकते हैं. शीबा की ये किताब इंसान के सफर को बयां करती है. जो हर किसी को अपने अंदर झांकने को मजबूर करती है. उन्होंने कहा कि इस किताब में इंसान के बारे में बताया गया कि वह कहां से आया, क्यों आया और उसका असल सफर क्या है. शीबा बताती हैं कि ये किताब ये बताती है कि हम मिट्टी से पैदा हुए हैं और एक दिन मिट्टी में ही मिल जाएंगे.
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us