Khangsar Palace: हिमाचल प्रदेश के लाहौल जिले में समुद्र तल से लगभग 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित खंगसर किला अपने आप में रहस्य और इतिहास समेटे हुए है. मिट्टी, लकड़ी और पत्थर से बना यह चार मंजिला किला आज भी 300 साल बाद मजबूती से खड़ा है. खास बात यह है कि 108 कमरों वाले इस किले में प्रवेश और निकास के लिए सिर्फ एक ही द्वार है.
एक दरवाजे वाला किला
इतिहासकार मानते हैं कि इस किले को ठाकुर अमरचंद ने बनवाया था. इसकी संरचना इतनी जटिल है कि यहां आने वाला आगंतुक आसानी से रास्ता भटक सकता है. अंदर के छोटे-छोटे कमरे, अंधेरे गलियारे और गुप्त मार्ग इसे और रहस्यमय बनाते हैं. यही कारण है कि दुश्मनों के लिए यह किला एक अभेद्य दुर्ग साबित होता था.
कुलदेवी के मंदिर का रहस्य
किले में स्थित कुलदेवी 'छुम्मादा माता' का मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है. यहां 300 सालों से अखंड ज्योत जल रही है. मंदिर के कपाट साल में सिर्फ दो बार ही खोले जाते हैं, जब फसल कटाई के बाद विशेष पूजा और मुखौटा नृत्य का आयोजन किया जाता है. मान्यता है कि देवी की प्रतिमा के बाल समय के साथ बढ़ते हैं और यह शक्ति पूरे क्षेत्र की रक्षा करती है.
शाही ठाट-बाट और संस्कृति
एक समय यह किला लाहौल की राजनीति और शाही जीवन का केंद्र था. विशाल रसोई, दरबार हाल और धार्मिक स्तंभ आज भी उस गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं. यहां की धार्मिक परंपराओं में बौद्ध और हिंदू मान्यताओं का अद्भुत संगम दिखाई देता है. तिब्बती संस्कृति से प्रभावित इस इलाके में आज भी पारंपरिक मुखौटा नृत्य और शस्त्र पूजा का आयोजन होता है.
रहस्य और आस्था का संगम
स्थानीय लोग मानते हैं कि कुलदेवी की शक्ति ने उन्हें बीमारियों और प्राकृतिक आपदाओं से बचाया. चेचक महामारी के समय देवी ने गांव के परिवारों की रक्षा की, यह लोककथाओं में आज भी सुनाई देता है.
खंगसर किला न केवल अपनी अनोखी वास्तुकला बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण भी विशिष्ट है. यह किला आज शांत और खामोश जरूर है, लेकिन इसकी दीवारों में इतिहास, आस्था और रहस्य की अनगिनत कहानियां दफन हैं. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि देवी की दिव्य शक्ति आगे भी इस क्षेत्र की रक्षा करती रहेगी.
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