कबाड़ी ने पेश की ईमानदारी की मिसाल, 6 महीने बाद लौटाया मालिक को लौटाया 10 तोला सोना

आज के समय में जब बेईमानी और स्वार्थ की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, ऐसे दौर में हरियाणा के फरीदाबाद के बल्लभगढ़ इलाके से आई एक घटना ने इंसानियत और ईमानदारी पर भरोसा मजबूत किया है.

आज के समय में जब बेईमानी और स्वार्थ की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, ऐसे दौर में हरियाणा के फरीदाबाद के बल्लभगढ़ इलाके से आई एक घटना ने इंसानियत और ईमानदारी पर भरोसा मजबूत किया है.

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Dheeraj Sharma
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100 Gram gold

आज के समय में जब बेईमानी और स्वार्थ की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, ऐसे दौर में हरियाणा के फरीदाबाद के बल्लभगढ़ इलाके से आई एक घटना ने इंसानियत और ईमानदारी पर भरोसा मजबूत किया है. भगत सिंह कॉलोनी में रहने वाले एक कबाड़ व्यापारी ने 100 ग्राम (करीब 10 तोले) सोने के गहने छह महीने बाद उनके असली मालिक को लौटा दिए. यह गहने गलती से कबाड़ में बिक गए थे.

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चोरी से बचाने की कोशिश बनी भूल

भगत सिंह कॉलोनी निवासी अशोक शर्मा पिछले वर्ष जनवरी में परिवार सहित कुंभ मेले में गए थे. घर से बाहर जाने के कारण उन्होंने अपने कीमती सोने के गहनों को सुरक्षित रखने के लिए एक डिब्बे में बंद कर बोरे में रख दिया, ताकि चोरों की नजर से बचा सकें.

दीपावली की सफाई के दौरान घर का पुराना सामान अलग करते समय परिवार को यह याद नहीं रहा कि उसी बोरे में सोना भी रखा हुआ है. अनजाने में वह बोरा अन्य कबाड़ के साथ स्थानीय कबाड़ी व्यापारी हाजी अख्तर खान को बेच दिया गया. किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस सामान को बेकार समझकर बेचा जा रहा है, उसके भीतर लगभग 15 लाख रुपये मूल्य के गहने रखे हैं.

चार महीने बाद खुला राज

समय बीतता गया। दिवाली पूजन के दौरान परिवार को अचानक याद आया कि सोने के गहने जिस डिब्बे में रखे थे, वह तो कबाड़ के साथ चला गया. परिवार के होश उड़ गए। तुरंत कबाड़ी से संपर्क किया गया.

हाजी अख्तर खान ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और अपने गोदाम में रखे कबाड़ को खंगालना शुरू किया. कई दिनों की तलाश के बाद आखिरकार वह डिब्बा मिल गया, जिसमें सोने के गहने सुरक्षित रखे थे.

पुलिस की मौजूदगी में लौटाए गहने

कबाड़ी व्यापारी ने पूरी ईमानदारी दिखाते हुए गहने अशोक शर्मा के परिवार को लौटा दिए. यह पूरा घटनाक्रम एसीपी जितेश मल्होत्रा की मौजूदगी में संपन्न हुआ, ताकि किसी तरह का विवाद न रहे. परिवार की आंखों में खुशी और राहत साफ दिखाई दे रही थी.

इंसानियत का मजबूत संदेश

इस घटना ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी आज भी जिंदा है. हाजी अख्तर खान ने बिना किसी लालच के लाखों रुपये के गहने लौटाकर समाज के सामने एक मिसाल पेश की है. यह कहानी बताती है कि सच्चाई और भरोसा किसी धर्म या जाति से नहीं बंधे होते.

बल्लभगढ़ की इस घटना ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि दुनिया में अच्छाई अभी बाकी है बस उसे पहचानने की जरूरत है.

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